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Showing posts from August, 2018

सतरंज।

सतरंज के मोहरे भी बड़े अजीब होते हैँ उनकी चालें बड़ी बेतरतीब होती हैं पर चालों का क्या मारते हैं काले गोरों को और गोरे कालों को ।।                             💐💐मनोज💐💐

मुहब्बत।

वो मेरी नजरों से भले दूर पर मन के करीब था वो मेरा वजूद मैं उसका वजूद था ना मिला कभी हमसे वो ना दूर हुआ पर रिश्ता हमदोनो का बड़ा अजीब था हाँथों का कंगन होती है मुहब्बत कभी बजती कभी सजती कभी फिर टूट जाती है।।                                 💐💐मनोज💐💐

वजूद।

नहीं चाहिये पद सिर्फ मद के लिये जीता हूँ मैं सिर्फ वजूद के लिये क्योंकि गर महफूज़ है मेरा वजूद तो फिर पद हो ना हो।।                               💐💐मनोज💐💐

गंध बाकी है अभी।

गंध बाकी है अभी उनके यादों की लबों पे लबों की छुअन तो बाकी है अभी।। हैँ परेशानियां जिन्दगी की राहों में बहुत बाकी है पर अभी उम्मीदों का हौसला।। बढ़ा देती हैं बेहद तनहाइयाँ मेरा दर्दे दिल हसरतें बाकी हैं अभी विसाले यार की।। मुफलिसी में अपना गुजर रहा है वक्त पर शेष है अभी जोशे अमीरे कारवां।। मानता हूँ जिन्दगी की नाव कमजोर है अभी पर समन्दर की लहरों से खेलना बाकी है अभी।।                                   💐💐मनोज💐💐

खरोंचों के निशां।

कराह उठता है मन देखकर उन घावों को जो मिले हैँ किसी बेकसूर को नस्तर की तरह काँप उठती है रूह देखकर उन खरोंचों के निशां जिसे आँखों के नुकीले नाखून ने नोचा सजदे करता हूँ हर सुबह तेरी ऐ रब अब तो बख्श दे तू जिन्दगी मरहूम की।।                             💐💐🎂मनोज🎂💐💐

बाकी है अभी।

गंध बाकी है अभी उनके यादों की लबों पे लबों की छुअन तो बाकी है अभी।। हैँ परेशानियां जिन्दगी की राहों में बहुत बाकी है पर अभी उम्मीदों का हौसला।। बढ़ा देती हैं बेहद तनहाइयाँ मेरा दर्दे फुरकत हसरतें बाकी हैं अभी विसाले यार की।। मुफलिसी में अभी अपना गुजर रहा है वक्त पर शेष है अभी जोशे अमीरे कारवां।। मानता हूँ जिन्दगी की नाव कमजोर है अभी पर समन्दर की लहरों से खेलना बाकी है अभी।।                                   💐💐मनोज💐💐

मैं बाँझ होती।

वाह रे विज्ञान वाह वाह रे विज्ञान तूने तो कमाल कर दिया सचमुच धोती फाड़ के रुमाल   कर  दिया आज तो आठवें आश्चर्य को भी सोचने पर मजबूर होना होगा विज्ञान बनाने वाले को भी रोना होगा काश !माँ ने भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये ही,बेटी को जना होता आज उसे देख न इसे रोना आता सुबह के उजाले से बेहतर अंधेरी शाम होती गोद भरी संतान से भली मैं बाँझ होती।।                                💐💐मनोज💐💐

मैं बाँझ होती।

वाह रे विज्ञान वाह वाह रे विज्ञान तूने तो कमाल कर दिया सचमुच धोती फाड़ के रुमाल   कर  दिया आज तो आठवें आश्चर्य को भी सोचने पर मजबूर होना होगा विज्ञान बनाने वाले को भी रोना होगा काश !माँ ने भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये ही,बेटी को जना होता आज उसे देख न इसे रोना होता                                💐💐मनोज💐💐

कलम के फनकार।

गर चाहिए तुमको सुकून तोड़ दो कलम भेज दो कलम के फनकार को कालापानी या फिर रंगून जब तक कलम होगी मेरे हाथ रूक नहीं सकता कभी  दे नहीं सकता मैं किसी भी अंधभक्त का साथ सच को सच और झूठ को झूठ कहता रहूँगा तुम्हारी अच्छाई को सराहूँगा बुराई को  डाहूँगा गर लगता है डर मेरी कलम की जुबान से मत कर फिर तू खिलवाड़ शेरे हिन्दुस्तान से।                                  💐💐मनोज💐💐

बैलून।

बैलून।        ************            **************                      ************* अपने पिताजी की ऊंगली पकड़ दशहरे के मेले में घूमते हुये नजर पड़ी एक बड़े से बैलून पर जिद बांध दी बैलून लेकर ही आया घर पर यह क्या वह तो फूट गया। मेले में आज भी जाता हूँ घूमने बैलून बिकते देखता हूँ ढेर सारे मन करता है ले लूँ पर नहीं लेता डर लगता है कहीं घर जाकर फिर से फूट न जाये ये बैलून।।        .                    💐💐💐मनोज💐💐💐

वार्धक्य।

केश का पक जाना चेहरे पर झुर्रियों का आना शरीर के चमड़ी का लटक जाना आँखों की रोशनी का कम हो जाना आवाज की गति का धीमा हो जाना चाल की गति में ठहराव का आना कार्य करने की क्षमता में क...

कुर्बानी कुर्बानी कुर्बानी।

कुर्बानी कुर्बानी............ गतांक से आगे... हाँ तो मैं बात कर रहा था कुर्बानी या बली की।कुर्बानी या बली वस्तुतः एक ही पर्याय हैं। हमारी सनातन परम्परा में बली और इस्लामिक परम्परा म़े कुर्बानी होता है।पर दोनो भाव मात्र समर्पण ही है।समर्पण सिर्फ और सिर्फ आत्मा का।दूसरे की नहीं अपनी आत्मा का ।अब आप कहेंगे यह कैसे संभव है?भला जब म़ै अपनी ही आत्मा का समर्पण कर दूँगा तो कुर्बानी कौन करेगा ?इसी को समझना ही तो असली कुर्बानी है मेरे भाई जान।जिस दिन हमने इसको समझ कर आत्मसात कर लिया अल्लाह हमारी कुर्बानी कुबूल कर हमारी सारी मुरादें पूरी कर देगा।अब आप यह समझें कि आत्मबली कैसे देंगे ?अपनी आत्मा को अल्लाह के नजर कैसे कुर्बान करेंगे? बड़ी आसान है इसे समझना और कर पाना।बस थोड़ा जी को कड़ा करना होगा।हिम्मत बाँधनी होगी ।क्योंकि आत्म हत्या करने जा रहे हैं आप। अरे घबरा गये आत्महत्या की बात सुनकर।डर गये न।भला सोंचीये आप मरने से कितना डर लगता है।आप मरना नहीं चाहते अपने अल्लाह के लिये लेकिन एक निरीह प्राणी को मार देना चाहते हैं।कभी सोंचा वह कितना डरा सहमा रहता होगा जब आप उसकी गर्दन रेत रहे होते होंगे।...

कुर्बानी कुर्बानी कुर्बानी।

कुर्बानी कुर्बानी कुर्बानी अल्ला को प्यारी है कुर्बानी।। अपने किशोरावस्था में एक सिनेमा देखा था ।उसका ये गाना मुझे बहुत पसंद आया।लेकिन तब इसका शब्दार्थ ही समझ पाता था भावार्थ या गूढार्थ की समझ नहीं थी।इस्लाम धर्मी भाई जान और हिन्दु भ्राता को भी बकरीद और दशहरे के पावन पर्व पर विशेष तौर से अपने घरों में स्वधर्मी देवस्थलों में बकरे को काटकर या खस्सी को काटकर अपने आराध्य या आराध्या को प्रसन्न करना एक विशेष प्रथा का निर्वहन या कहें त्यौहार के जश्न को मनाते देखता था।तब लगता था शायद हमारे धर्मग्रंथों में ऐसु प्रथा कहीं वर्णित होगी जिसका अनुकरण आज भी हो रहा है।पर आज जब अध्ययनशीलता को ही अपना धर्म बनाया और लेखन को कर्म तब यह समझ में आने लगा कि हम कितना विपरीत आचरण करते हैं।अपने पूर्वजों की बनाई परंपरा का या उनकी बताई बातों का ।बिल्कुल अर्थ का अनर्थ।वैसे मैं कुर्बानी या बली प्रथा विरोधी नहीं हूँ।म़ै इसका पूर्णतया समर्थन करता हूँ।बली भी देनी चाहिए और कुर्बानी भी करनी चाहिये।ये हमारी धार्मिकता के अभिन्न अंग हैं।जो कोई भी इसके विरोध में बात करते हैं बिल्कुल वे दोषी हैं।                       ...

कुर्बानी।

इस्लाम धर्मावलंबी भाईयों का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है बकरीद।इस दिन सभी धर्मवलंबी भाई जान अपने अपने घरों में कुर्बानी देते हैं।पर शायद इन्हें इसका वास्तविक मतलब पता नही...

आत्मचिंतन।

सासु ससुर गुर प्रिय परिवारु। फिरहु त सब कर मिटै खभारु।। तुलसी सप्ताह के अन्तर्गत महामना गोस्वामी तुलसीदास  जी के विचार उन सौभाग्यवती स्त्रियों के लिये जिनके पति कहीं अ...

राष्ट्रपिता।

राष्ट्रपिता ............. ....................... ............................. ईश्वर परमपिता है इसलिए कि उसने सृष्टि की रचना की सजाया सँवारा विकसित किया मैं पिता हूँ क्योंकि मेरे रजोगुण से मेरी सन्तति ने जन्म लिया उन्हें पाला पोषा सँवारा मैंने उनके सुख दुःख में साथ निभाया डाँटा फटकारा स्नेह भी किया कभी उनके बीच दरार की लकीर नहीं खींची जरूरत पड़ी तो खिंचती लकीर को मिटाने का भरसक प्रयत्न किया इसलिए ,क्योंकि मैं पिता हूँ भारत का जन्म भगवती भारती के गर्भ से पिता स्वयम् परमपिता यें मैं नहीं शास्त्र कहते हैं उद्घोषक ऋषि साज सज्जा प्रकृति प्रदत्त फिर कोई कैसे इस उन्नत राष्ट्र का पिता हो सकता है जिसने इस अखंड का खंड किया जिसके कारण इसकी अस्मिता हंड भंड हुई जिसके कारण दो भाइयों ने एक दूसरे का रक्तपान किया जो इन्हें रोक न सका तमाशबीन बन सब देखता रह गया हाँ,एक बड़ा काम उसने किया अपने नापाक विचारों को साकार कर पाक राष्ट्र का निर्माण किया पिता का दर्जा पाने का हक इसे मिलना चाहिए राष्ट्रपिता बनने का हक है वहाँ जिस जहाँ को इ...

अटल।

ब्रह्मचारी धर्म रक्षक वीरव्रतधारी अटल भारती के पुत्र तूने कर दिया सूना पटल रो रहा है विश्व सारा गा रहा गुनगान जग है भले शान भारत का गया पर कीर्ति है फिर भी अटल न रार ठाना न हार माना दिल से सबको अपना जाना नियति नियंता के समक्ष भी तू रहा अजर अमर और अटल ।।                 गोलोकवासी भारतमाता के लाडले                 अमर्त्यपुत्र भारत रत्न कलम के सिपाही राजनीति के आधारस्तंभ तिरंगे के आन बान और शान के संरक्षक महापंडित अटल बिहारी वाजपेयी ,भारत के भूतपूर्व प्रधानसेवक के श्री चरणों में कोटिशत नमन्।                                     💐💐मनोज💐💐

महिमा रामभक्त तुलसीदास की।

आनन्दकानने ह्यस्मिञ्जङ्गमस्तुलसीतरुः। कवितामञ्जरी भाति रामभ्रमरभूषिता।। श्री राम चरितमानस की महिमा का बखान करने के पूर्व महाकवी के मानस रचना के उपरांत समाज में फै...

कितना बदल गया इंसान।

देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान कितना बदल गया इंसान। कथनी करनी में भेद हुआ है आसमान म़े छेद हुआ अब जान समझ सब हो गये हैं नादान कितना बदल.........। स्वार्थ परक हैँ करम हमारे ल...

आदर्श

ब्रह्मांड की अनंत शक्तियों के अधिकारी होकर भी हम अपनी आँखों पर अपनी ही हाँथों से पर्दा कर लेते हैं फिर रोते है चिल्लाते हैँ अंधकार को कोसते है खोजते हैँ भगवान को कहाँ? कभी ...

आत्मचिंतन।

जस जस सुरसा बदन बढ़ावा तासु दून कपि रूप दिखावा।। सत जोजन तेहिं आनन कीन्हां अति लघुरूप पवनसुत लिन्हा।। बदन पैठ पुनि बाहर आवा मांगा विदा ताहि सिर नावा।।                    ...

आत्मचिंतन।

जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी सोई नृप होहीं नरक अधिकारी।। श्रावण शुक्ल सप्तमी आने वाली है।आज के ही दिन महामना गोस्वामी तुलसीदास का अवतरण दिवस मनाया जाता है।कुछेक विद्वा...

जय कन्हैया लाल की।

नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की खेलन को पाय गयो हाथी घोड़ा पालकी।। यशोदा के नंदन को संग भयो ग्वाल की केशर औ कुम कुम से तिलक कियो भाल की ।। मुख दधी लेप कियो फोड़ दियो मटकी मैया ने देख लियो भाग पड़्यो झटकी।। गैया चरावैं औ मुरली बजावैं मुरली की धुन पै गोपियन नचावैं।। डाली कदंब चढ़ि लीला दिखावैं अद्भुत अनंग छवि गोकुल के लाल की।। जय कन्हैया लाल की जय कन्हैया लाल की।। जय कन्हैया लाल की जय कन्हैया लाल की।।                        💐💐श्री कृष्ण जन्मोत्सव की                                         अशेष💐💐💐                         💐💐मंगलकामनाये                                              मनोज💐💐 🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🏁🏁🏁🏁🏁🏁🏁🏁🏁🏁🏁🏁🏁🔔☎📟🎤📯🎷🎸🎹📻📣📯📢🔕🏊🏇🎲🎮🎯🚵🏆🎿🏂🏄🎣♠🃏♣

मैं को मैं की तलाश।

मैं !को मैं की तलाश       **************** मैं !मैं को ढूंढ रहा हूँ मां की पवित्र कोख से जन्म लिया पिता की गोद माता कीे आंचल मे पला बेटा कहलाया । बहन ने प्यार दिया दुलारा झगड़े किया भाई ने साथ खेला कुट्टि की फिर भी भाई ही कहलाता रहा। विद्यालय गया पढ़ाई की गुरु ने शिक्षा दी मित्रों ने सहयोग किया हंसी ठिठोली की शिष्य और मित्र बनकर रह गया। बालपन खत्म ,किशोर बने सुन्दर सुशील कन्या ने वरण किया नई पहचान बनी पति की कुछ दिनों बाद पत्नी ने अपने प्यार का प्रतिफल पुत्र को कन्या को जन्म दिया पिता बन गया मैं। परिजनो के भरण पोषण के लिए नौकरी ढूढना आरंभ किया नौकरी मिली नौकर बनकर रह गया। बच्चा बड़ा हुआ पढ़ाया लिखाया उसकी शादी भी कर दी उसके भी बच्चे दादा जी कहने लगे। शरीर थका कमजोर हुआ बिना बताये अचानक बीमारियों ने घेरा डाला काल के दूत लेकर चले गये अपने साथ पहले प्रेत फिर पितर मैं। मैं !मैं को ढूढता ही रहा ढूढता ही रहा।                            💐💐मनोज💐💐

व्यंग्य करो।

व्यंग्य करो या रंग भरो जितना जी मे आये तुम तंग करो बदरंग करो। मैने तो पी ली है भंग सह लूंगा तेरे सारे व्यंग्य नहीं करूंगा तुझको तंग। मिट जाये भले ही अंग अंग चलता आया हूँ चला क...