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Showing posts from March, 2019

चुनावी चर्चा।

चुनावी चर्चा। 💐💐💐💐 मैंने सोंचा चलो आज कर लेता हूँ बैठे बिठाये कुछ चुनावी चर्चा/क्योंकि इसमें होना नहीं है जेब से कुछ खर्चा/कुछ इधर से कुछ उधर से मिल जायेंगे मशाले/समय कट जायेगा बैठे ठाले/तो आइये शुरु करते हैं/हम नाम किसी भी प्रत्याशी का नहीं धरते हैं/बस  देश के चंद कर्णधारों के क्रियाकलापों को पढ़ते  हैं/इसी बहाने चर्चा को लेकर आगे बढ़ते हैं/ एक तथाकथित भावी कर्णधार से जनता जनार्दन ने पूछा श्री मान अब तक की सामाजिक उपलब्धि बतायें हमें अपनी/ताकि फोड़ सकें हम भी आपके नाम की ढकनी/माननीय ने कहा जनाब पहले आप करना सीखें हमारा सम्मान /भले मैंने आपका वर्षों किया है अपमान/किन्तु अब तो जाग चुका है हमारा सोता ज्ञान/मेरी उपलब्धि सुनकर आप रह जायेंगे अचंभित/मैं इसे कहते हुये हूँ आपके बीच दंभित/सबसे पहली उपलब्धि मेरी माँ रह चुकी है विधाईका पिता रहे हैं सांसद/इसीलिये हक मेरा बनता है तू जान/हो तैयार अब करने को मेरा सम्मान/दूसरी भी बताता हूँ यह तो था ट्रेलर पिक्चर अभी बाकी है/मेरे परिजनों के द्वारा किये गये क्रिया कलाप क्या नहीं जानते आप/ उन्होंने धारण किया था खादी/मैं हूँ आज भगवा बुनियादी/जरूरत महसूश ...

अक्षयवट की छाँव में।

अक्षयवट की छाँव में। 💐💐💐💐💐💐 सच में बड़ा सुकून मिलता है अक्षयवट की छाँव में कहाँ जा पाता हूँ अब गाँव गिराँव में ढूंढना पड़ता है अब तो गाँव को शहर के ठाँव में बावला हो जाता हूँ देखकर बावली के शुष्क स्वरूप को बड़ी सुकून मिलता है तब बैठ जाता कभी अक्षयवट की घनी शीतल छाँव में शोर भी भोर पड़ जाता है यहाँ देखकर बनते शहर को गाँव में बचपन की मस्ती भी सिमट जाती है बस अक्षयवट की छाँव में सच में बड़ा सुकून मिलता है जब कभी बैठता हूँ अक्षयवट की छाँव में।। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐@पद्मनाभ*******

इंतजार में।

आखिर मैं हूँ कौन? समझ नहीं पाया  आज तक मुगालते में केवल रूप को बदलता रहा अब तक  शायद रूपसी के इंतजार में ।। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐@पद्मनाभ****

रामनवमी।

रामनवमी। 💐💐💐💐 आ रही है  रामनवमी पताके फहरेंगे बजेंगे ढोल नगाड़े लाल पीली हरी नीली पगड़ी पहन हाँथों में लिये शस्त्र भीड़ की शक्ल में होंगे हम सड़कों पर जय श्री राम के नारों से होगा गुंजायमान आसमान भी मैं सोंच रहा हूँ आखिर जय बोलूँ मैं तो किस राम की वाल्मीकि के राम की जिसने रक्षा की संतों के स्वाभिमान की ताड़का को मारकर या फिर तुलसी के राम की जिसने कहा  भय बिनु होहिं न प्रीत भवभूति के राम की जिसने लोकानुरंजनार्थ संकल्प लिया स्नेह दया सौख्य या फिर जानकी तक को छोड़ने का या उस राम की जो गाँधी के मुख विवर से निकल गया हे राम कहकर या उस राम की जो बैठा है भगवा की कैद में बाट जोहता अपनी रिहाई का आखिर मैं  बोलूँ जय तो किस राम की? 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐@पद्मनाभ****

सराब निकला।

जिसकी चकाचौंध से चुँधिया रही थीं आँखें वह तो सराब निकला ऊपर से था साफ सुथरा भीतर तो पुछल्लों का सैलाब निकला आँखें धोखा खा गईं शायद जागते में देखा कोई ख्वाब निकला।। 💐💐💐💐💐💐💐@पद्मनाभ**********

आन बान शान।

कुक्कुर को भौंकता देख रास्ता छोड़ देना यह कैसा धर्म है उसके भौंकने के मर्म को समझना इंसान का ही तो कर्म है कुत्ते का भौंकना ही तो उसकी कमाई है इसी के लिये तो उसने मालिक की रोटी खाई है अगर आप हैं शेर तो दहाड़ कर दिखाईये कुत्ते को खदेड़ कर रास्ते से भगाईये हाँथ जोड़कर इसके आगे  न मिमियाईये धनुष को सिर्फ कंधे पर न लटकाईये अब कीजिये संधान न भटकाईये सिर्फ ध्यान बचा लीजिये अब तो आप आन बान और शान। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐@पद्मनाभ*********

एक रास्ता तो बनाईये।

वो बोलती है  वह भी बोलता है दोनो के रंग भी हैं एक से उसकी बोली को हम तरसते हैं उसकी बोली पे हम बरसते हैं एक का रंग लगता है प्यारा दूसरे के आते ही छा जाता है घना अंधेरा ये घर है जनाब मकान मत बनाईये इस दिल को समझिये इसे दुकान मत बनाईये ये शहर है शरीफों का इसे शमशान मत बनाईये कुछ समझिये कुछ समझाईये गर तोड़ नहीं सकते तो दीवार के बीच से ही सही एक रास्ता तो बनाईये 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐@पद्मनाभ**********

माँ।

माँ। **** माँ तो बस माँ होती है जिसके कदमों में सारा जहाँ होती है हो जाये भले मति क्षीण नजरों की रौशनी हीन फिर भी बेटे के कदमों की आहट सुन दिल परेशाँ होती है हाँ माँ तो बस माँ होती है नजरें नजारों से भले बेनूर होती हैं पर संतानों के स्पर्श में कोहिनूर होती हैं एक बार बस मिल जाये स्पर्श ममता का क्या कहने दुःखों का दर्द सब दूर होती हैं हाँ माँ तो बस माँ होती है कहना बड़ा आसान होता है निभाना होता है कठिन क्योंकि वह माँ होती है  जो दिन बिताती है पल पल गिन गिन रातों को निहारती आसमां तारों को गिन गिन उम्र होती जाती है क्षीण हड्डियां होती अतिदीन जुबाँ भी लड़खड़ाती है फिर भी  अमरत्व काआशीष देती है हाँ माँ तो बस माँ होती है। कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति गलत नहीं कहते हैं यती माँ के कदमों में दिखती है  इसकी प्रत्यक्ष परिणति मातृ चरण रज धारण में ही है सद्गति जिसने भी इसका परित्याग किया पाया है वह दुर्मति दुर्गति  वह तो स्नेह आगार होती है हाँ माँ तो सिर्फ माँ होती है।। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐                  ...

होली है।

रंगोत्सव की टोली है सब कहते हैं होली है आबालवृद्ध की हँसी ठिठोली है सब कहते हैं होली है मालपूये और भंग मिली यह बोली है ठंढै पीकर मस्त सभी कहते हैं कि होली है कुर्ता फाड़ा फाड़ा बनियान मिटा सके न दिल के अरमान अजब किस्म की टोली है सब कहते है बुरा न मानो होली है।। 💐💐💐💐💐💐💐💐@पद्मनाभ*******

किनारा काट लिया।

किनारा काट लिया है मैंने सत्तर वर्षों के व्यापार से नेह लगी है लगन लगी ईमानदार चौकीदार से जिसने जिंदा खींचकर लाया अभिनंदन को सीमा पार से मौन पड़े थे धृतराष्ट्र पितामह भीष्म कौरव से तब मुक्ति मिली थी देवकीनंदन श्री कृष्ण अवतार से राष्ट्र चमत्कृत होगा अब तो बस  केशरिया रंग बौछार से साईकिल होगी पंचर  हाँथी के सवार से तिनका तिनका बिखरेगा झाड़ू का बस पंजे की मार से विष बुझे तीर के चलने से लालटेन बुझ जायेगा बाल न बाँका होगा सूरज का खद्योतों के चमकार से।। देश सुरक्षित होगा तब ही  जब नेह लगे ईमानदार चौकीदार से।। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 💐💐💐💐💐💐💐@पद्मनाभ*********

फाग मधुवन में।

फाग मधुवन में। ************ राधा खेल रही है फाग आज मधुवन में बजा दे जरा बाँसुरी कान्हा हाथ लिये पिचकारी राधा हाथ अबिर की थाली गोप ग्वालन झूम रहे हैं पी पी करके भाँग  आज मधुवन में राधा खेल रही है फाग आज मधुवन में बजा दे जरा बाँसुरी नंद बाबा संग खेलें यशोदा गौरा के संग गौरी खेलें संग संग झूमें भुत बैताल आज मधुवन में राधा खेल रही है फाग आज मधुवन में बजा दे जरा बाँसुरी विष्णु के संग लक्षमी खेलैं जनकसुता संग खेलें राम संग संग झूम रहे हनुमान आज मधुवन में राधा खेल रही है फाग आज मधुवन में बजा दे जरा बाँसुरी भक्त जनन के मन हर्षावै तन मन सुधि अब कोई न पावै मदन मोहिनी संग संग झूमैं आज मधुवन मे राधा खेल रही है फाग  आज मधुवन में बजा दे जरा बाँसुरी।। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐@पद्मनाभ***********

बहार आ गई।

बहार आ गई ********** आपके आने से मेरी जिन्दगी में मानो बहार आ गई ऐसा लगा जैसे कहीँ रेत पर फुहार आ गई                  सुबह को देख रंग सूरज का                  लगा शर्माया यौवन                  चहकती चुरगुन ने भी                  छेड़ी मानो राग भैरवी पिला दो रूप रस  मुझको दो घूँट रजत के प्याले से कि सूखे होंठ तर जायें।। 💐💐💐💐💐💐                        💐💐💐💐@पद्मनाभ*****

इंतज़ार में।

इन्तज़ार में। ********* मेरे मन को मोह लिया मीठी बातों से चुरा कर ले गये दिल जी रहा बमुश्किल अकेला मैं तन्हाईयों में मिलन की आस लिये उनसे सुबह उदास न मिले चैन  दिन को न सपने रात में आते तरसें अँखियाँ नितदिन लगे सूना  आँगन बैरन सेज बिन तेरे सूख गये  नीर नयनों  के इन्तज़ार में।। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐                           💐💐@पद्मनाभ*********

बहारें।

आने से आपके  आ गई ं बहारें गाये गीत मीठे कोकिले ने आँगन में                किया नर्तन चाँद ने                चाँदनी संग सुमधुर                सुहानी रात में                                  चेहरे खिले                                  आ गई लाली                                  सुर्ख होंठों पर                                  लगी सुरमा नयन में  न हो अधीर तन छुओ नेह का नीर डारो सदा कर मन चित को थीर तुम।।                                  💐💐💐@पद्मनाभ** 💐💐💐💐💐💐💐💐

फेसबुकिया।

फेसबुकिया। ********** आजकल जब जाता हूँ किसी क्षेत्रिये या राष्ट्रीय मंच पर ससम्मान आयोजक श्रोता ये कहकर करते हैं अपमान आ गये अब कविता पढ़ने फेसबुकिया कवि महान सुनकर ये उनके तीखे तंज सोचा क्यों न कर लूँ दो दो हाँथ उनके संग भी लड़ लूँ एक जंग इसी चक्कर में आज फोड़ रहा हूँ अब तक की बंद अपनी चुकिया उनके लिये जो कहते हमें फेसबुकिया वे बेचारे आयोजक श्रोता दर्शक शायद इस बात से हैं अन्जान कि ये फेसबुकिया कवि होता है  कितना महान आप सिमटे हो क्षेत्रीय या फिर राष्ट्रीय मंचों की सीमा तक पर यह फेसबुकिया है असीम अंतरराष्ट्रीय पहचान है इसकी क्षेत्र से देश तक ही नहीं विदेश तक है इसकी पहचान सैंकड़ो नहीं लाखों की तादाद में होते हैं इसके फालोअर ये करता है राज उनके दिलों पर फौरयेभर नमन करें हम इस मंच महान का जिसने बनाया हमें प्रिय सकल जहान का                          💐💐💐@पद्मनाभ****** 💐💐💐💐💐💐

राधा।

राधा बन बाधा हरे सजाये मंदिर जानकी काल बन लाये काट शीश हरे कालिका ले खींच शत्रु प्राण की नारी वही भवभामिनि जो करे रक्षा निज स्वाभिमान की।।                        @💐💐💐पद्मनाभ******* 💐💐💐💐💐💐

साहित्यिक व्याल।

हम जो देखते हैं परखते हैं महसूस करते नित्य चतुर्दिक बदलते परिवेश को उकेर देते हैं यथावत् वैसे का वैसा सरल सहज  भाव लिये नहीं आता हमें उलझाना शब्दों के भँवर जाल में छंद अलंकार रस या अन्य  साहित्यिक व्याल में तो आइए सुनाते हैं दास्तान आज की ताजा हम  गये थे मंदिर माँ मंगला के दरबार फूल प्रसाद के साथ खरीदा पूरा नारियल इस बार पहले हटाई जट्टा फिर पटक कर फोड़ दिया खोपड़ा नारियल का बह गया पानी रह गई साफ सुथरी मुलायम नारियल की गिरी मन झूम उठा देखकर  चित्त प्रसन्न हो गया लगा साक्षात् माँ मंगला  मेरे सामने बैठी मुस्कुरा रही हैं क्यों नहीं यही तो प्रक्रिया है आराध्य के साक्षात्कार की पहले हटाओ जटा इच्छाओं की फिर मिटाओ अहंकार खोपड़ी को फोड़कर बह जायेंगे नकारात्मक विचार स्वतः नारियल के पानी की तरह देगी माँ दर्शन तब  कोमल मुलायम स्वच्छ नारियल गिरि के रूप में।। 💐💐💐💐💐💐@पद्मनाभ*************

बा अदब।

भाषा        भाव              अदब                     सब                          हो                              रहे हैं बे अदब इन दिनो            किसी से             बात करना मुनासिब नहीं बाअदब           भूल गये हैं            ककहरा संस्कारों के पहाड़ा सुविचारों के             अब तो याद भी नहीं              दादा जी की वह सूक्ति अभिवादन शीलस्य नित्यम् वृद्धोपसेविनः चत्वारि तस्य वर्द्धंते आयुःविद्या यशो बलम्।।              पता नहीं यह पछिया हवा है              या पूर्वी बयार की आँधी।।                               @💐💐💐पद्मनाभ****

चरण छू।

चरण छू गोड़ लग्गी हाँथ जोड़               प्रणाम              नमस्कार बोलकर वड़क्कम             सत्श्रीअकाल              अस्सलाम्वालेकुम् आजकल भूलकर शुरु हो गया है                         घुटन छू                         नमस्कार का नया दौर देखते रहिये                आयेगा अब                क्या क्या और? @💐💐💐पद्मनाभ*********************

खिला गुलाब।

अपने आंगन में आज देखा गमले में खिले गुलाब के तीन फूल मन प्रसन्न चित्त आह्लाद से परिपूर्ण हो गया। इन खिले फूलों की पंखुड़ियों को खुलकर कली से फूल की शक्ल धारण करते देखता रहा हूँ पिछले कै दिनों से हर दिन हर पल प्रतिपल पल पल। आज खुश हूँ इसके खिले सँवरे सजे खिलखिलाते रूप को देखकर पर सोंचने लगा आखिर खिले तो तीन ही क्यो? मन ने मनन किया चित्त ने चिंतन किया मस्तिष्क के मंथन के बाद परमात्मा की प्रेरणा से आत्मा ने आवाज दी सत्व रज तम  को भेद कर ही तो मन प्रसन्न हो खिलखिलाता है ठहाके लगाता है खुद भी हँसता है जग को भी हँसाता है इसी खिले गुलाब की तरह काँटों से ऊपर रहकर। 💐💐💐💐💐@पद्मनाभ💐💐💐💐💐

तू आदमी।

गर जीतना है महाभारत तो अर्जुन बनना ही होगा बनके दुर्योधन बिखर जायेगा अंग अंग सर्वांग। बबूल सजा होता है काँटों से इसीलिये काटा जाता है बार बार लगे होतें हैं सुन्दर सुगन्धित रसदार पीले फल आम के इसीलिये सींचे जाते हैं सौ बार। निर्णय करने का अब तुझे है अधिकार आदमी दो में से क्या चाहिये आखिर मुहब्बत का कारोबार या कि नफरत की लंबी दीवार बुद्धि है विवेक है समझ की शक्ति से ओत प्रोत नौका की थामना मजधार में अपना पतवार। लहरें उठेंगी गिरेंगी आयेगा दौर तूफानो का भयंकर प्रलयंकर पर खड़ा होगा तू हाँथों में थामे पतवार अभयंकर  जब थम जायेगा दौर तूफान का पार होगी नाव देखेगा  सबसे पहले सुनहले किरण को प्राची में तू आदमी।।                💐💐💐@पद्मनाभ💐💐💐

कब्जियत।

कब्जियत। मित्रों कब्जियत एक ऐसी बीमारी है जो कितने ही बिमारियों को जन्म देती है।जैसे पेट फुलना,गैस होना,अफारा,डमारा,सर चकराना ,उल्टी की शिकायत होना आदि आदि।जब एक कब्जियत के कारण इतनी सारी बीमारियों के शिकार हम होते हैं स्वभावतया हमारी भूख मर जायेगी।जब भूख मर जायेगी तो खाना नहीं खायेंगे,खाना नहीं खायेंगे तो खाली पेट में गैस बनेगा ही,जब गैस बनेगा तो पेट फुलना स्वभाविक है,जब पेट फुलेगा तो उसे खाली भी करना ही पड़ेगा।पर यह अपने बस की बात नहीं।नतीजा जब भी जहाँ कहीं भी किसी भी माहौल में बैठेंगे तो पूरा माहौल दुर्गंधमय होगा ही।परिणाम भी मिलना ही है मिलता भी है।उस दुर्गंध से बचने को नाक दबाये धीरे धीरे वहाँ बैठे लोग बाहर होंगे और हम वहाँ अकेले बैठे अपनी कब्जियत पर चिंतन करेंगे जिसके कारण लोग हमसे दूरी बनाने लगे हैं।अरे भाई आप कहीँ देश में चल रहे वर्तमान माहौल पर तो चिंता नहीं करने लगे।कुछ नेताओं को तो कब्जियत ने नहीं घेर रखा है।वैसे लाजिमी है घेरना भी।वो इसलिये क्योंकि अबतक तो बेचारे सिर्फ खाते ही आये थे।लगातार खाने के चक्कर में फारिग होना मुनासिब समझा नहीं।वो इसलिये भी कि कहीं फारिग होने के चक्...

चौकीदार।

चौकीदार अकेला कर रहा है सामना सबका उस मेढक की तरह जो सारी रात बरसात मे चतुर्दिक घिरा काले मेघों से टर्र टर्र कर हमें जगाये रहता है और हम उसे अपनी चैन की खातिर दूर भगाने की नाकाम कोशिशों में मशगूल ठीक वैसे जैसे कोई एयर स्ट्राइक के प्रमाण  की माँग कर रहा फिर भी वह अडिग स्थिर शांत अपनी ड्यूटी पर मुश्तैदी से तैनात। 💐💐💐💐💐@पद्मनाभ***************

नैन शराबी।

नयन शराबी गाल गुलाबी होठों पर मुस्कान लिये माथे की बिन्दिया मेंहदी हाँथों की अधर सुधा रसपान किये दोऊ नैनन बाण चलावत है  नागिन सी लट लहरावत है     भृकुटि कमान कुण्डल शोभित कान   पिया मिलन की आस लिये मन में उल्लास हास हिय मे प्रिय राह निहारत मान किये                             💐💐मनोज💐💐 समग्र मित्रवरों को होली की अनंत शुभकामनाएं।

बड़ा धोखा।

क्या ऐसा कहीं देखा है देश के साथ कितना बड़ा धोखा है कहा लायेंगे राफेल तब खेलेंगे भारत पाक खेल बिना तिथि बताये ही मिराज से गोले को दिया ठेल बात बार बार हो रही थी सर्जिकल स्ट्राइक की दिखा दिया फिल्म  एयर स्ट्राइक की देश सबकुछ देख रहा है सबकुछ समझ रहा है आनेवाले चुनाव में सोंच समझकर  ईवीएम पर मारेगा चोट ताकी कहीं बरबाद न हों उसके दिये हुये वोट। 💐💐💐💐💐@पद्मनाभ💐💐💐💐💐

मुहब्बत के खत।

मुहब्बत के खत एक बार फिर से लिखना चाहता हूँ मैं मगर अफसोस तेरा पता ही गुम हो गया आओ न एकबार मिल लें हम दोनो फिर से चंद पल ही तो शेष हैं।। 💐💐💐💐💐@पद्मनाभ💐💐💐💐💐