गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने अमूल्य ग्रंथ रामचरितमानस में लिखा है*जाकी रही भावना जैसी * *प्रभु मूरत देखी तिन तैसी* आज उसे देख ली वैसी की वैसी जाति धर्म सम्प्रदाय वर्ण की टूट गई सारी सीमाएं प्रसन्न हूँ हमारे बजरंगबली हनुमान अब बन गये अचानक से सबके मेहमान।। 💐💐💐💐💐@पद्मनाभ💐💐💐💐💐