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कितना बदल गया इंसान।

देख तेरे संसार की हालत
क्या हो गई भगवान
कितना बदल गया इंसान।
कथनी करनी में भेद हुआ
है आसमान म़े छेद हुआ अब
जान समझ सब हो गये हैं नादान
कितना बदल.........।
स्वार्थ परक हैँ करम हमारे
लूट संस्कृति मची चौबारे
अपने मुँह करते अपना गुनगान
कितना बदल..........।
भ्रष्ट तंत्र का लिया सहारा
जनतंत्र बन रहा बेचारा
व्यभिचारी है धर्म हमारा
फिर भी करते गुनगान
कितना बदल ......।
कुर्सी की खातिर हमने है
बेच दिया ईमान
कितना बदल गया........।
                              💐💐मनोज💐💐

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