सबके घर में दीप जलेंगे मेरे घर अँधियारा होगा। इस दो रंगी नीति से आखिर कब छुटकारा होगा।। उनके घर में फुटे फटाखे मेरे घर पर धुआँ धुआँ। उनके बच्चों की किलकारी मेरे बच्चे हुआँ हुआँ।। कैसी यह नीति कैसा रिवाज है यह। बिन पेंदी के टहरी सा समाज है यह।। एबीसीडी का ज्ञान नहीं पर हुकूमत छाँट रहे। एम.ए.,पी.एच. डी.करके खाली हाँड़ी झाँक रहे।। लगातार वर्षों से ये मुफ्त में ज्ञान को बाँट रहे। उम्मीदों की देहली पर ही जीवन अपना काट रहे।। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 उन सभी वित्तरहित कर्मियों को जो कि विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों में कार्यरत्त रहकर अपने जीवन को सरकार या प्रबंधन या फिर तथाकथित अहितकारी कर्मचारी संघ के मनमाने पन के शिकार हो रहे हैं, को आनेवाली दीपावली की बहुत बहुत बधाई,शुभकामनाएं। आपका ही एक शोषित मित्र। 💐💐💐💐💐@मनो http://xn--81b.com/ 💐💐💐💐