💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐मामकाः पाण्डवाश्चैव💐💐💐💐 💐💐💐💐💐कलियुग के आगमन का संकेत💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 महानायक श्री कृष्ण को समझ पाना बड़ी मुश्किल नहीं तो बड़ा आसान भी नहीं।डूबना पड़ता है।गहरे पानी पैठ।अब देखिये श्रीमद्भवद्गीता के प्रथम श्लोक की यह अर्द्धालि।"मामकाःपाण्डवाश्चैव"।सामान्य अर्थ बड़ा ही सहज है ,मेरे और पाण्डु की संतानें।किन्तु थोड़ा गहराई में जाने पर इसका रहस्य समझ पाना थोड़ा आसान प्रतीत होता है।अब तक जिस परिवार में साम्यता थी।सारी व्यवस्थायें संयुक्त संचालित होती थीं।आपस में कहीं कोई भेद नहीं दिखता था।अब सबकुछ छिन्न भिन्न होने के कगार पर है।तभी तो परिवार के मुखिया वयोवृद्ध धृतराष्ट्र महाराज के मन मे ये मेरे और पाण्डु के का भाव बोध हो रहा है।जहाँ अबतक सिर्फ हमारा था वहाँ मेरा तेरा का संकेत। अयं निजः परोवेति कलिकाल के आगमन की पूर्व सूचना।"मामकाः पाण्डवाश्चैव"।यही कारण है कि प्रभु श्री कृष्ण ने इससे निजात पाने का उपाय आरंभ में ही बता दिया"क्षेत्रे क्षेत्रे धर्मम् कुरु"कहकर।यदि कलिकाल के दंश से परिवार ,समाज या राष्ट्र की रक्षा करनी है तो...