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Showing posts from July, 2019

कलियुग के आगमन का संकेत।

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐मामकाः पाण्डवाश्चैव💐💐💐💐 💐💐💐💐💐कलियुग के आगमन का संकेत💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 महानायक श्री कृष्ण को समझ पाना बड़ी मुश्किल नहीं तो बड़ा आसान भी नहीं।डूबना पड़ता है।गहरे पानी पैठ।अब देखिये श्रीमद्भवद्गीता के प्रथम श्लोक की यह अर्द्धालि।"मामकाःपाण्डवाश्चैव"।सामान्य अर्थ बड़ा ही सहज है ,मेरे और पाण्डु की संतानें।किन्तु थोड़ा गहराई में जाने पर इसका रहस्य समझ पाना थोड़ा आसान प्रतीत होता है।अब तक जिस परिवार में साम्यता थी।सारी व्यवस्थायें संयुक्त संचालित होती थीं।आपस में कहीं कोई भेद नहीं दिखता था।अब सबकुछ छिन्न भिन्न होने के कगार पर है।तभी तो परिवार के मुखिया वयोवृद्ध धृतराष्ट्र महाराज के मन मे ये मेरे और पाण्डु के का भाव बोध हो रहा है।जहाँ अबतक सिर्फ हमारा था वहाँ मेरा तेरा का संकेत। अयं निजः परोवेति कलिकाल के आगमन की पूर्व सूचना।"मामकाः पाण्डवाश्चैव"।यही कारण है कि प्रभु श्री कृष्ण ने इससे निजात पाने का उपाय आरंभ में ही बता दिया"क्षेत्रे क्षेत्रे धर्मम् कुरु"कहकर।यदि कलिकाल के दंश से परिवार ,समाज या राष्ट्र की रक्षा करनी है तो...

कलम की धार।

मैं तलवार नहीं कलम की धार रखता हूँ। बम गोलियों से नहीं शब्दों से वार करता हूँ।। दाण्ड्याययन की धरती है ये जहाँ चाणक्य रहते हैं सिकंदर की क्या विसात जहाँ च़द्रगुप्त बसते हैं।। होगा तू सूरमा अपने शहर का। गामा सरीखे यहाँ हजार रहते हैं।। तेरी एक वार के बदले मैं दस दस वार करूँगा। फिर भी नफरत के बदले मैं तुझसे प्यार करूँगा।। बस एक बार तू सुन ले बात मेरी कान खोलकर। दुबारा न झांकना इस दर पे यहाँ इंसान बसते हैं।। गर पता हो गई तेरी नीयत खाम है। तुझे बेहतर पता है इसका क्या अंजाम है।।  चाहता है अगर तू अमन चैन जहाँ में। तू नेक बन तू एक बन बन्दे यही पैगाम है।।                                   💐💐मनोज💐💐

जीवन समर।

जीवन समर में विजयी होना है तो श्रीमद्भवद्गीता को पढ़ना ही होगा"। 💐💐💐💐💐💐                   💐💐कृष्णं वंदे जगद्गुरुम्💐💐                                     🎂🎂 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 हमारी भारतीय संस्कृति का उद्भव नाना पुराण निगमागम सम्मत है।तभी तो जब "राम चरित मानस"के प्रणेता संत शिरोमणि महामना गोस्वामी तुलसीदास जी से मानस रचना विषयक प्रश्न पृच्छा हुयी उन्होंने बड़ी सहज भाव में प्रत्युत्तर समर्पित करते हुये कहा"नाना पुराण निगमागम सम्मतं यत् रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोपि"।श्रीमद्भगवद्गीता भी उसी प्रकार अपने पूर्ववर्ती या परवर्ती रचित शास्त्रों का सार समुच्चय प्रतीत होता है।चार वेद,एक सौ आठ उपनिषद, अठारह पुराण ये हमारे भारतीय संस्कृति के मूल हैं।भारतीय संस्कृति को जानना ,समझना,पहचानना, या मानना है तो इन शास्त्रीय सागरों के अंतस् में डूबना ही होगा।तभी "जिन ढूंढा तिन पाइयाँ, गहरे पानी पैठ "की सार्थकता सिद्ध हो पायेगी।किन्तु इस कलिकाल के अतिव्यस्ततम क्षण में यह संभव प्रतीत नहीं होता।इसीलिये शायद कलिकाल आगमन की पूर्व संध्या पर महानायक ,महान शास्त...

समवेत आयुः ।

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐समवेत आयुः उत्सवः।💐 अर्थात् सम्पूर्ण जीवन में "क्षेत्रे क्षेत्रे धर्मम् कुरु"का अनुपालन करते हुये जीवन को उत्सवमय बनाना चाहिये।अब प्रश्न यह कि धर्म है क्या?हम तो प्रतिदिन मंदिर जाते हैं,मस्जिद जाते हैं,गुरुद्वारा जाते हैं,गिरजा जाते हैं,वहाँ प्रार्थना करते हैं,नमाज अता करते हैं,अरदास करते हैं,प्रेयर करते हैं ।धर्म तो कर ही रहे ह़ै।शिखा रखते ह़ै ,त्रिकाल स़ंध्या करते हैं,च़दन लगाते हैं,भगवान की आरती करते हैं,प्रसाद भोग अर्पित करते हैं।पाँचों वक्त नमाज अता करते हैं।सबद कीर्तन करते हैं।बाईबिल की आयतों का पाठ करते हैं।हम धर्म नहीं कैसे करते।यही तो धर्म है।पर मैं कहता हूँ यह धर्म नहीं यह तो धर्म की पूर्व पीठिका है।क्योंकि धर्म की वैयाकर्णिक व्याख्या करेंगे तो "धृ धारणे धातु"से निष्पन्न धर्म धारण करने को कहा गया है।अर्थात् पूर्व पीठिका के क्रम में जो अनुभूतियां हमें प्राप्त होती हैं उन्हें अपने आपमें आत्मसात कर तदनुसार आचरण ही वास्तव में धर्म है।इसीलिये शायद धर्म को रूढ़ नहीं करते हुये इसे विस्तृत फलक पर बिखेरा गया,जीवन को समवेत करते हुये ...

त्वमेवमाता।

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 💐💐त्वमेवमाता च पिता त्वमेव💐 💐त्वमेव बन्धुःच सखा त्वमेव💐 💐त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव💐 💐त्वमेव सर्वं मम देव देव💐💐 ईश वंदना के रूप में मानव जीवन के संबंधों को प्रदर्शित करती प्रार्थना की ये पंक्तियां सिर्फ पठनीय ही नहीं ,अवलोकनीय ही नहीं अपितु अनुकरणीय भी हैं।जीवन में संबंधों का बड़ा महत्व माना गया है।खासकर भारतीय जीवनशैली का मूलाधार संबंध ही होते हैं।इन संबंधों में गिरावट के कारण ही आज भारतीय जीवनशैली छिन्न भिन्न होने के कगार पर खड़ा दीख रहा है।यदि इससे निजात पाना चाहते हैं तो हमें उपरोक्त पंक्तियों पर गहन विचार करना होगा।इसकी सम्यक् व्याख्या करनी होगी।इसे आत्मसात करना होगा।जिस स्वच्छंदता को हम स्वतंत्रता का नाम दे स्वैराचार करने पर आमादा हैं वह आज हमें पतनोन्मुख बना रहा है।हम स्वतंत्र हैं स्वच्छंद नहीं।स्वतंत्रता कहीं भी स्वच्छंदता को प्रेरित नहीं करती।यदि ऐसा होता तो स्वतंत्र राष्ट्र के संचालन हेतु विधि सम्मत व्यवस्था नहीं बनाई जाती।इसी विधिसम्मत व्यवस्था को प्रदर्शित करता उपरोक्त मंत्र हमें रिश्तों में बंधकर जीवन जीने की कला सिखलाता है।जीवन आरंभ माता पित...

त्वमेवमाता।

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 💐💐त्वमेवमाता च पिता त्वमेव💐 💐त्वमेव बन्धुःच सखा त्वमेव💐 💐त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव💐 💐त्वमेव सर्वं मम देव देव💐💐 ईश वंदना के रूप में मानव जीवन के संबंधों को प्रदर्शित करती प्रार्थना की ये पंक्तियां सिर्फ पठनीय ही नहीं ,अवलोकनीय ही नहीं अपितु अनुकरणीय भी हैं।जीवन में संबंधों का बड़ा महत्व माना गया है।खासकर भारतीय जीवनशैली का मूलाधार संबंध ही होते हैं।इन संबंधों में गिरावट के कारण ही आज भारतीय जीवनशैली छिन्न भिन्न होने के कगार पर खड़ा दीख रहा है।यदि इससे निजात पाना चाहते हैं तो हमें उपरोक्त पंक्तियों पर गहन विचार करना होगा।इसकी सम्यक् व्याख्या करनी होगी।इसे आत्मसात करना होगा।जिस स्वच्छंदता को हम स्वतंत्रता का नाम दे स्वैराचार करने पर आमादा हैं वह आज हमें पतनोन्मुख बना रहा है।हम स्वतंत्र हैं स्वच्छंद नहीं।स्वतंत्रता कहीं भी स्वच्छंदता को प्रेरित नहीं करती।यदि ऐसा होता तो स्वतंत्र राष्ट्र के संचालन हेतु विधि सम्मत व्यवस्था नहीं बनाई जाती।इसी विधिसम्मत व्यवस्था को प्रदर्शित करता उपरोक्त मंत्र हमें रिश्तों में बंधकर जीवन जीने की कला सिखलाता है।जीवन आरंभ माता पित...

बिहार में बहार हे।

बिहार में बहार हे तब्बे न ई पी.जी.सड़क केतना दिन से बीमार हे ई पुरनका डगदर से न सुनत अब लगैथे नया डगदर के दरकार हे रोग भींज गेल हे भीतर तक झोला छाप के इलाज से न संभरत डर लग हौ देख के आवैत हिचकी लगतार हे।। बकि कैल का जाय  ई बुद्ध महवीर आउ  विष्णु के विहार हे शंतिये हे धरम न जनली कहियो करांति के मरम एही से न पटना  आऊ गया के आपस में पेयार हे। बिहार में बहार हे सेही से न पी.जी. सड़क एता दिन से  बेमार हे।। @पद्मनाभ******* 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

गया जी की संगीत साधना।

गया जी की संगीत साधना। 💐💐💐💐💐💐💐💐 इतिहास के पन्नों में पढ़ा था कि जब यदुकुल नंदन कृष्ण के मुरली की तान फिजां में तैरती थी तब जंगल में विचरण करती गौयें और मृगियों के झुंड दौड़े चले आते थे।जब मियाँ तानसेन दीपक राग का आलाप लेते थे तो बुझे हुये दीप अपने आप जल जाते थे,जब बेमौसम भी मेघ मल्हार की तान छेड़ते थे तो शून्याकाश में काले काले मेघों के साथ झमाझम वर्षा की बूँदें मौसम को खुशमिजाज बना देती थीं।इतिहास के पन्नों की ये बात इति माने बिती और हास माने महज कहानी सा प्रतीत होता था।किन्तु जब विगत दिनों बोधगया की पावन धरती पर आयोजित गया जी की आध्यात्मिक और सांगीतिक साधना पर संपन्न हुये सेमिनार में मंचस्थ विद्वानों से यह जाना कि इस पावन गयाजी की गोद में ऐसे लाल खेले हैं जिन्होंने अपनी साधना के दम पर मेघ मल्हार की तान पर बेमौसम आकाश को कृष्ण वर्णीय मेघाच्छन्न कर बरसने पर मजबूर किया है।सुनकर मुझे इतिहास के पन्नों की बातों के सिर्फ कहानी मानने पर बहुत अफ़सोस हुआ।अपने आप पर क्रोध आया ,उस महान साधक के बहुत निकट रहकर भी आखिर मैंने आजतक इस सत्त्य से अपने आपको महरूम क्यों रख्खा।आज उस महात्मा के प्रति ए...

अतीत के छाँव में।

अतीत की छाँव में पलता वर्त्तमान भविष्य की नींव का लिये हस्त प्रस्तर प्रसस्त विमुखता की स्थिति में मुख म्लान क्षीणकाय मंदमति सबकुछ अस्तव्यस्त संस्कार संस्कृति से  अरति होगी भ्रमित बुद्धि विचार शून्य लक्ष्य अभेद्य जीने को जीवन विवश कश्मकश जिन्दगी इंसान की ध्वस्त सर्वेसाम् समस्त।। @पद्मनाभ******* 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

भारती भा--रति।

भारती----भा --रति 💐💐💐💐💐 हे भारती के पुत्र तुम क्यों भा--रति हो बन गये निज शौर्य का कर त्याग क्यों रंग रोगन कर रहे। थी ज्ञान की गंगा बहती जहाँ अब नृत्य नंगा हो रहा हरदम वहाँ।। थी तान मुरली की बजती जहाँ रास ही थी कृष्ण की लीला यहाँ कृष्णलीला नित्य ही है हो रही मैल मन से है नहीं पर धुल रही।। पान जो करते सुधा का थे कभी वे पान मधु का कर रहे हैं अभी थे नायक महाराणा होते जहाँ थीं गूँजती गाथायें वीरता शिवराज की।। अब नहीं होते महानायक राणा यहाँ नहीं गूँजती गाथायें शिवराज की थीं नायिकायें दुर्गा लक्ष्मी सरस्वती यहाँ चलचित्र की तारिकायें नायिका कहला रहीं।। कहे जाते कभी थे लाल धरती के मनुज बोझ बन भूभार जीवन ढो रहे हो दनुज हो दृष्टिहीन विलुप्त स्मृति बन अकर्मण्य नित अभिषप्त सा जीवन जी रहे।। @पद्मनाभ******* 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

पिये जा रहा हूँ।

पिये जा रहा हूँ। 💐💐💐💐💐 पिये जा रहा हूँ मैं बस ज़ाम लब से लिये जा रहा हूँ न कोई गिला है न है कोई शिकवा तेरी याद में जिये जा रहा हूँ मैं बस जाम लब से लिये जा रहा हूँ। न रोको मुझे तुम न टोको मुझे मेरे हाल पे यूँ मुझे छोड़ दो तेरे ग़म को दिल में सिये जा रहा हूँ मैं बस ज़ाम लब से लिये जा रहा हूँ।। नहीं कोई मदिरा का आलय यहाँ  मधुघट नहीं और प्याले यहाँ न कोई भी साकी पिलाता मुझे  नहीं झूमने को बताता मुझे अपनी ही मस्ती जिये जा रहा हूँ पिये जा रहा हूँ मैं बस जाम लब से लिये जा रहा हूँ।। @पद्मनाभ******* 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

गयाजी की संगीत साधना।

गया जी की संगीत साधना। 💐💐💐💐💐💐💐💐 मौन प्रकृति के उद्भव से" ऊँ"कार अर्थात् प्रणव का प्राकट्य।प्रणव से महाकाली,महालक्षमी, महासरस्वती का प्रकटिकरण।पुनः महासरस्वती से संगीत के षडज का प्राकट्य।चल पड़ी वीणा के तारों से सुकोमल हस्तास्पर्श पा संगीत की मधुर धारा।इस धारा में गोताखोरी करने को आकुल व्याकुल साधक कूद पड़े प्रकृति का इशारा पाते ही।लगे तैरने शून्याकाश के बीच।तैरते रहे घंटों,दिनों,महीनों ही नहीं वर्षों लग गये तैरते तैरते।आखिर किनारा मिला साँस ली और ह्रदय के अंतस् से निःसृत हुयी संगीत की प्रथम ध्वनि "सा"।रुके नहीं तैरते रहे ध्वनियाँ प्रकट होती और समाती रहीं ह्रदय के अःतस् में "रे,ग,मा,प,ध,नी"और रुकीं नहीं पुनः उच्चरित हुई "सा"।और यही स्वर बना संगीत का "सा रे ग मा प ध नी सा",और फिर धारा के विपरीत भी वही लय वही स्वर "सा नी ध प म ग रे सा"।और बंध गया इन्हीं सात सुरों में सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया का तमाम संगीत।बंधन भी क्षणिक तथाकथित आज के प्यार वाला नहीं अपितु सृष्टि पर्य़ंत के लिये।ऐसे ही सुरसाधकों की कड़ी में गया जी के तीर्थ पु...

एक दृष्टिकोण"गयाजी"।

गया जी की पावन धरती जहाँ जगपालक भगवान विष्णु,अंशावतार भगवान राम और कृष्ण के चरण रज से सुवासित है वहीं सनत सनंदन आदि ऋषियों के साथ ही सप्तर्षियों की तपःस्थली भी रही है।महर्षि दुर्वासा के आह्वान पर माँ गंगा,गोदावरी, यमुना ,सरस्वती का आगमन भी जलश्रोत के रूप में हुआ है।परम पावन फल्गु एवं मधुश्रवा आदि नदियाँ नित जगन्नियन्ता के पाँव पखारती पुण्यात्माओं को मोक्ष प्रदान करती हैं।भगवती सती के स्तन भाग माँ मंगला रूप में पालन करती हैं,वहीं ऋग्वेद की ऋचाएँ जिनका प्रणयन इसी गयाजी की पावन धरा पर  हुआ। "अग्नि मीडे पुरोहितं"। साहित्य,संगीत एवं कला की तपोभूमि गयाजी अपनी क्रोड से अनेकों नामचीन हस्ताक्षरों को अवतरित कर चुकी है जिनका नाम गयाजी के इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में अंकित है।आज भी कई ऐसी विभूतियाँ प्रत्यक्षतः अपनी कला ,संगीत,एवं साहित्य के माध्यम से विश्व स्तृर पर ख्यातिलब्ध हो रहीं हैं।बड़ा ही स्वर्णिम काल रहा है गयाजी का।बोधगया स्थित महाबोधि सोसायटी का सभागार आज के इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का गवाह बना।मैं आभारी हूँ उन विद्वद्वरेण्यों के जिनके श्रीमुख से उपरोक्त वाणी का श्रवण किय...

गयाजी की संगीत साधना।

गया जी की संगीत साधना। 💐💐💐💐💐💐💐💐 इतिहास के पन्नों में पढ़ा था कि जब यदुकुल नंदन कृष्ण के मुरली की तान फिजां में तैरती थी तब जंगल में विचरण करती गौयें और मृगियों के झुंड दौड़े चले आते थे।जब मियाँ तानसेन दीपक राग का आलाप लेते थे तो बुझे हुये दीप अपने आप जल जाते थे,जब बेमौसम भी मेघ मल्हार की तान छेड़ते थे तो शून्याकाश में काले काले मेघों के साथ झमाझम वर्षा की बूँदें मौसम को खुशमिजाज बना देती थीं।इतिहास के पन्नों की ये बात इति माने बिती और हास माने महज कहानी सा प्रतीत होता था।किन्तु जब विगत दिनों बोधगया की पावन धरती पर आयोजित गया जी की आध्यात्मिक और सांगीतिक साधना पर संपन्न हुये सेमिनार में मंचस्थ विद्वानों से यह जाना कि इस पावन गयाजी की गोद में ऐसे लाल खेले हैं जिन्होंने अपनी साधना के दम पर मेघ मल्हार की तान पर बेमौसम आकाश को कृष्ण वर्णीय मेघाच्छन्न कर बरसने पर मजबूर किया है।सुनकर मुझे इतिहास के पन्नों की बातों के सिर्फ कहानी मानने पर बहुत अफ़सोस हुआ।अपने आप पर क्रोध आया ,उस महान साधक के बहुत निकट रहकर भी आखिर मैंने आजतक इस सत्त्य से अपने आपको महरूम क्यों रख्खा।आज उस महात्मा के प्रति ए...

अभिनंदन वंदन।

अभिनंदन वंदन चंदन ललाट पर उन चरणों के रज का करूँ नित जिसने दिया जीवन। करूँ समर्पण भावाञ्जलि जिसको दिया आज तिल उदक मिश्रित तर्पण की समर्पित कर पुष्प ले भर अञ्जलि पुष्पांजलि पूरित नीर नयन। की कामना आशीष की माँगा वर हों पूर्ण सारे कार्य  जो रह गये अधूरे आपके दें शक्ति बुद्धि विवेक हे आर्य। मान कुल का रख सकूँ  सम्मान सबका कर सकूँ हर दिवस करूँ मैं  पितृदेव श्री चरणों का वंदन।।               पुण्यश्लोक पुज्य पितृदेव स्मृतिशेष कविराज त्रयाचार्य पं.वेदनाथ मिश्र के १३हवें पुण्य स्मृतिदिवस की वेला में साश्रु नयन समर्पित काव्याञ्जलि तर्पण। आषाढ़ शुक्ल चतुर्दश्याम्।                     💐💐💐                        💐💐 @******पद्मनाभ                          💐💐💐💐💐💐💐💐💐

दोष किसका?

दोष किसका ................... कुछ दिनो पूर्व मैं भ्रमणार्थ महानगर मुम्बई गया था शानदार जानदार लहरदार शानोशौकत से लकदक शोभा ही निराली है जहाँ दिन और रात का अंतर  नहीं समझ पाया जुहु विलेपार्ले आधुनिक माल से लेकर मैरिन ड्राइव और और भी न जाने  बहुत कुछ साथ में सिद्धि विनायक  महालक्ष्मी मंदिर के अलावे  लालबाग के बादशाह का दर्शन लगे हाथों होटल ताज और  गेटवे आफ इन्डिया भी देख लिया और कुछ देखने की  लालसा ने पहुंचा दिया एक वृद्धाश्रम में  आधुनिक सभी सुविधाओं से  परिपूर्ण फिर भी लगा कुछ अपूर्ण सुन्दर सुगन्धित फूलों से सजे बाग की एक बेंच पर  नजर गई देखा दो वृद्धायें  बैठी आपस में मशगूल हैँ कुछ चर्चा में  मैं भी कुछ जानने की चाहत लिये उनके निकट गया पूछा माता जी आपदोनों की आपस में रिश्तेदारी है क्या? दोनो ही चौकी बोली तुम्हें कैसे मालूम  हाँ हम दोनो समधन हैं मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ पूछा  वो कैसे? वे बोलीं बड़ी हुलसकर अरे भाई इनकी बेटी मेरी बहु है  और मेरी बेटी का विवाह  भी इनके बेटे से ही हुआ है अब बताओ हम समधन ही हुए ना मैं सोंच में डूब गया  तो फिर ऐसा कैसे आखिर दोषी कौन ? दोष किसका?                 ...

पूरब पश्चिम।

जरा गौर फरमायेंगे आप पूरब और पश्चिम की  सभ्यता में सूरज उगता है सदा  पूरब में अस्त सदा  होता है पश्चिम में परिणाम स्पष्ट है पुर्वी संस्कृति सूर्य की  गति से गतिमान शनैःशनैः वर्द्धमान पश्चिम में अस्त  यही कारण है  सबकुछ अस्त व्यस्त                            💐💐मनोज💐💐

तेरी जुल्फें।

काली कजरारी जुल्फों को देखकर तेरी आकाश में छायी बदली का भान होता है काली काली जुल्फो़ के बीच देख तेरे मुखड़े को बदरी के बीच से झाँकता चाँद सा जान होता है आकाश में बिखरे चमकते तारों को देख लगता है तेरे साड़ी का पल्लू लहरा रहा मद्धिम मद्धिम हवा की सरसराहट मानो कानो में कोई फुसफुसा रहा सावन के वर्षा की फुहारों से महकती मिट्टी के गंध मानो दामिनी की कोमल  काया की सुगंध अँधेरी रात के सन्नाटे को चीरती झींगुर की झुनझुन मानो बंद कमरे में सेज़ पर तेरे पायल की रुनझुन गर्मी के बाद बरसात का आना  जैसे तेरे मायके से सौगात का आना @पद्मनाभ******

अपना तो उसूल है।

अपना तो उसूल है  अपनो के लिये कुछ करते रहना आप मानो या न मानो मेरे मन को जानो या न जानो बिना सोंचे बिना समझे मुझको तो आता बस आगे बढ़ते रहना जरूरी नहीं जो मैं सोचूँ आपकी सोंच भी माकूल हो रास्ते अपने अपने सोंच अपनी फिर साथ चलने के कैसे सपने गर ठान लिया है चलने को साथ साथ फिर तो देना होगा हाँथ में हाँथ मान लिया है दिल से अगर अपना बंद करो फिर देखना कोई अन्य सपना तेरे सपने भी वही होंगे  जिसे देखे सिर्फ अपने होंगे दिल का मिलना किसी से एक बार होता है इस मिलन का आधार केवल एतवार होता है न हो एतवार तो मिलन बेकार होता है बिखरने का बहाना तो सौ सौ बार होता है खुला आसमान खुला जहान यहाँ आज हम यहाँ कल तुम कहाँ बस एक बार सी लो होंठों को दफन कर दो गिले सारे  बहारें आयेंगी चमन खिल उठेगा महकेगी बगिया गुलाब की महक से।। @*******पद्मनाभ💐💐💐💐💐💐💐💐

बुल्लेट ट्रेन।

मेट्रो ने आसान कर दी यात्रा बिना थके लंबा सफर  चेहरे पर थकान का नामोनिशान नहीं फुल्ली ए. सी.जो है लीजीये न मजा अब तेज रफ्तार का चंद घंटों में इस शहर से उस शहर का अरे शहर ही क्यों जनाब सूबा तक का सफर तय कीजिये  बस कुछ घंटों में आ रही है बुल्लेट ट्रेन जल्द ही बढ़ जायेगी रफ्तार  हमारे जिन्दगी की भागेंगे आखिर बुल्लेट के साथ जो। @*******पद्मनाभ💐💐💐💐💐💐💐💐

ऐ हवा।

आज तुम्हें पाकर अपने नज़दीक मिज़ाज खुश हुआ  दिल के भीतर तक समा गई गुदगुदी सुबह से शाम देर रात तक पलक पाँवड़े बिछाये  लगाये टकटकी  निहारता रहता था राह तेरे आने की कट जाती थी रातें तेरे इंतज़ार में करवट बदल बदल कर  आज पाकर तेरा  स्नेहिल स्पर्श रोम रोम पुलक उठा सिहर उठा तन बदन ऐ ठंढी हवा  तुम तो आई ही साथ में वर्षा रानी को भी ले आई जो। @*******पद्मनाभ💐💐💐💐💐💐💐

ये शहर है।

ये शहर है कहने को तो महानगर है एक दूसरे के साथ  प्रेम से गले मिलना भी दिगर है खोये रहते हैं सब अपने आप में पड़ोस में क्या हो रहा कहाँ किसी को खबर है शायद इसीलिये क्योंकि ये शहर है हाँ ये महानगर है मंदिर मस्जिद गिरजाघरों पर नित ढाये जा रहे कहर हैं जिसने अभी आँख भी न खोली उन नन्हीं परियों के भी कतरे जा रहे पर हैं रिश्तों में घोले जा रहे ज़हर हैं क्योंकि ये शहर हैं ये ही महानगर हैं सब सुनकर देखकर हैं मौन पुरसा हाल पूछता कहाँ किसी का अब कौन  इससे तो बेहतर रहता  कहने को गाँव जहाँ अब भी पक्षियों को मिलता ठाँव आपस में निभती अब भी रिश्तेदारी बात बात पर नहीं होती मारामारी माई बहिन भौजाई ननद के बीच है यारी भाई से लेता भाई सलाह है पैदा कम हो ज्यादा कहाँ किसको परवा है राम के भरोसे होता है सब काम बेवजह नहीं करता कोई किसी को बदनाम जब होती है शाम कीर्तन के स्वर गूँजते पहर याम अल्ला हो अकबर या कहते श्री राम जय राम जय जय राम।। @*******पद्मनाभ💐💐💐💐💐💐💐💐

तक्षक।

*****तक्षक***** आलोकित पथ करो हमारा हे जग के अंतर्यामी। काम क्रोध मद लोभ मोह मात्सर्य बनू नहीं पथगामी।।            तेरा नाम सदा हो मुख में             हे जगपालक जगदाधार।             एक तुम्हीं स्वामी हो जग के             तुम्हीं एक हो पालनहार।। तक्षक आता हर पल मग मे भय दिखलाता बारंबार। रोक नहीं सकता कोई भी तिथि सुनिश्चित सप्त ही वार।।                अज्ञानी जन समझ न पाते                 माया तेरी अपरंपार।                 आवागमन पूर्ण सत्य है                 जीवन का यह मूलाधार।                  🎂🎂🎂🎂🎂मनोज💐💐💐

रंगा सियार।

आखिर किस पर विश्वास करें जिसको देखो रंगा सियार ही नजर आता है हर बरसात में मेढक की आवाज सुनाई पड़ती है कभी कभी उछलता कूदता  चेहरा भी दीख जाता है बरसात के बाद पता नहीं कहाँ लोप हो जाता है अगले मौसम के इंतज़ार में रंगे सियार का हाल भी वही दीखता है एक ही वारिस में धुल जाता है रंग सारा huh फिर वही हुआँ हुआँ।। @*****पद्मनाभ💐💐💐💐💐💐💐💐

मूलाधार।

संस्कृत संस्कृति और संस्कार यही तो हैं मानव जीवन के मूलाधार इनसे विमुख जीवन  अस्तित्व हीन निराधार  उस मेघ की तरह जो आये उमड़े घुमड़े पर चला जाये  बिन बरसे। @*****पद्मनाभ💐💐💐💐💐💐💐💐

तृषा।

न जाने क्यूँ सागर और मेघ के बीच हो गई है अनबन पवन की भूमिका भी दिखती है संदिग्ध मेघ जब भी मिलना चाह रहा है सागर से हवा खींच कर उड़ा ले जाती है कहीं और कवाब में हड्डी की तरह बीच में आ जाती है मेघ के गुस्से से आगबबूला हो  गरजता है चिंघाड़ता है मेघ पर बरस नहीं पाता  बुझा नहीं पाता तृषा  अतृप्त धरती की  चाहकर भी मिल नहीं पाता सागर से मेघ  विपरीत गति पवन की वजह। @******पद्मनाभ💐💐💐💐💐💐💐💐

मिठाँस।

इस बार गाँव की यात्रा क्रम में लहलहाते गन्ने के खेत को देखकर मन में जगा भाव बैठकर खेत में गन्ने के रस चूसने का बैठ गया अकेले ही तोड़कर ले हाँथों मे कुछ गन्ने धीरे धीरे साफ किया ऊपर लगे पत्तों को अपने ही हाँथों से अब लगा चूसने पोर दर पोर बड़े ही रसदार गन्ने थे मिठास से भरपूर पर आ गई गाँठ बीच में सोंचा इसे भी चूस लूँ गन्ने के मीठे पोर सा रस भरा होगा पर दाँतों के बीच दबाते ही गाँठ का स्वाद बदल गया  न मीठा न नमकीन बिल्कुल फीका सा तोड़कर फेंक दिया गाँठ को एक झटके में फिर लगा चूसने पोर दर पोर गन्ने का सुमधुर सुस्वादु रस से भरपूर मन भर गया मिठाँस से। @******पद्मनाभ💐💐💐💐💐💐💐💐