दस दरवाजे ********* कल मेरे एक मित्र ने कहा चलो नया मकान लिया हूँ, चलकर देख लो।मित्र मित्र होता है भले ही उसका कथन विचित्र होता है।मैं साथ मे चल पड़ा ।मन मे उत्साह और उमंग था।मित्र के नये मकान को देखने का।लो आ गया।यही तो है मेरा नया मकान,दरवाजे को खोलता अंदर आने का आमंत्रण देता वह मकान के अंदर प्रवेश कर गया।मैं दरवाजे पर ही खड़ा उस मकान को निहारता अपने विचारों मे खोया था कि अचानक मित्र ने मेरी तंद्रा यह कहते हुए भंग की ,अरे तू अभी तक यहीं खड़ा है ,आ चल अंदर चलकर बैठते हैं, गप्पें मारते हैं। . क्या करता पीछे पीछे चल पड़ा।मकान केअंदर जाने पर उसने इसकी खूबियां गिनानी आरंभ कर दी।जानता है इस मकान मे पूरे दस दरवाजे हैं और खिड़कियां सिर्फ दो।लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता ये दो खिड़कियां ही पूरे मकान को रौशन कर देती हैं।दसो दरवाजे से होकर बड़ी अच्छी हवा पूरे घर कोआनंदमय बना देती है।मन को प्रसन्न कर देती है। मैं चुप चाप उसकी बातों को सुन रहा था अब तक।पर अब मुझसे उसका झूठ सहन नहीं हो रहा था।मैने धीरे से उसके मुंह...