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Showing posts from May, 2018

लाठी बनो स्वयम्

जमाने के बदलते परिवेश मे एक नई सी चलन का आरंभ हाँथ पैर दिल दिमाग सलामत फिर भी बैसाखी के सहारे की आदत। गर है दम तो अपनी लाठी बनो स्वयम् वर्ना टूटते ही बैसाखी के धराशायी हो जाओगे लूले लंगड़े बन वापस घर को आओगे लोग कहेंगे लौट के बुद्धु घर को आये पाये क्या घर का आँटा गील कराये। होकर मौन चुपचाप निःशब्द बेजुबान से अतीत की स्मृतियों में खोये अवाक्  दृष्टिपात मात्र ही कर पाओगे।।                                      💐💐मनोज💐💐

झुलसैत गरमी

पसीना से सराबोर हे तन वदन तनिको न लगे कोई काम मे मन बिजली के आंखमिचोली से परेशान कखनी साँझ कखनी भेल बिहान पते न चले पियासल छछनै थे परान नदी तलाब कुआँ चुँआड़ी सब सूख गेल ना जानी परकिरती के कैसन हे ई खेल चापा हो या सरकारी नल  सगरो हथ लोग खलिये बल्टी लेके बैठल मीडिया भी लिखैत हे एकर ताजा खबर तैयो न हे असर मुनिसपिलेटी पर एकर सुनैत ही कि पानी भरल टैंकर आवत सबकोई ओकरे से अपन पियास बुझावत बोतल में बंद बिक हे पानी बकि ओकरो कीमत लग हे मनमानी कहाँ गेलन गंगा गोमती झेलम ब्रह्मपुत्र माई कोई तो बताव ई झुलसैत गरमी के दवाई आखिर कौन अपराध होल हमनी से भाई जेकर एतना कठिन सजा देईत हथ भाष्कर भाई एकरा कौनो नेता न बोल हथ न करथ कोई उपाय आब अब हमनिये मिलके सोंची कि का कैल जाय।।                                         💐💐मनोज💐💐

नेता सोइ

नेता सोई जो गाल बजावै जनता को जो ढाल बनावै।। वादा प्रतिकूलता हो स्व धर्म आश्वासन पर चलता निज कर्म।। उड़न खटोला उड़े अकाश परिजन में अपनो का वास।। देश भले रसातल जाये विदेश भ्रमण कर नीति बनाये।। नर में करे नारायण दर्शन धर्मनीति का होये प्रदर्शन।। गर चुनाव हो आय जनार्दन के द्वारे जाय।। हाथ जोड़ विनती करे अबकी फिर से देहु जिताये।। मनमे कछु विकार मत धरिये अपराध मोहे सब आप बिसरिये।। जीतब तोहरी कृपा को पाय समाधान सब करिबे धाय।। जबहीं इनको दिये जिताये बरस पाँच नहीं दर्शन पाय।। जाके संसद गये भुलाये सेम सेम कहि कहि भरमाये।। जन समस्या गयो भुलाये अपने वेतन वृद्धि पाये।।                                  💐💐मनोज💐💐

अपने गांव में

बरगद की छांव में तपती गरमी की तपस से पाने को राहत आ पहुंचा अपने पैत्रिक घर के दरवज्जे पर खड़ा सदियों से अभिभावक की मानिन्द हमारे हर क्रिया कलाप पर नजर गड़ाये एकटक निहारते शीतल समीर प्रदाता वृद्ध अक्षयवट की ठांव में अपने मखपा गांव में।                             💐💐मनोज💐💐

अव्यंग्य

अव्यंग्य को ही व्यंग्य बताऊंगा ---------------------------------------- समाज अध्ययन की किताब मे मैंने पढ़ा था,मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह, ज्ञानी है ध्यानी है स्वाभिमानी है और साथ साथ अभिमानी हैः ज्ञान, अपने लिए ध्यान दूसरों का स्वाभिमान यदा कदा जब जागे पर आभिमान सदा सर्वदा लेखन का वाचन का प्रवाचन का अवलोकन का स्मरण का। सुशब्द अपशब्द सब जायज भले कोई नकारे वा सराहे। हम जानते हैं हर युग एक नई संस्कृति का प्रणेता रहा है। इस युग में मैं यही सिखलाऊंगा अपशब्दों की भाषा ही पढ़ाऊंगा। चने की झाडं पर ही चढ़ाऊंगा अव्यंग्य को ही व्यंग्य बताऊंगा। तोड़ की भाषा मे ही जोड़ का तोड़ बताऊंगा अनीती को ही नीति मान समाज को उस पे चलाऊंगा। साहित्य और संस्कृति छोड़ खोखले विचारों की धारा बहाऊंगा।।                       💐💐🎂मनोज🎂💐💐

नमामि गंगे

करता हूँ मैं नमन तुम्हारी माँ गंगे स्वीकार करो उद्धार किया है सगर तनय का मेरा बेड़ा पार करो।। शिव की जटा से बहनेवाली विष्णुचरण में वास किया दीन दुखी पापी प्राणी.हो सबका बेड़ा पार किया।। पान किया अनुपान किया स्पर्श किया स्नान किया नाम लिया फिर तर गये चाहे श्रद्धा का ही दान दिया।। भूलोक नही है भुवर्लोक तक महिमा तेरी न्यारी गाते हैं सब ऋषिगण मिलकर मैं जाऊँ तेरी बलिहारी।। अवतरण दिवस तेरा है माता बलि बलि जाऊँ हे जगत्राता तर जाता है भवसागर से सानिध्य तेरा जो पाता।। सुन ले पुकार कर क्षमादान हूँ सुत तेरा नादान पुत्र कुपुत्र भले हो जग में माता होती सदा महान।।                             🎂🎂नमामि गंगे🎂🎂                              💐💐मनोज💐💐

बाबा भोला

बाबा भोला के दरबार बम बम बोल रहल हे।। भांग धतूरा संग बेल के पत्ता दूथ दही घृत मधु संग मीठ्ठा भस्म ललाट मे शोभे ला सीधा अकवन फूल के माला चढ़ल हे।बाबा भोला........ गणपति गौरी बासुकी नंदी कार्तिक कृतमुख भोला संगी डमरु त्रिशूल के साथे शृंगी डिमडिम बाज रहल हे।बाबा भोला............ बितल अषढ़वा आयल सावन सब ऋतुअन से ई मनभावन हरी हरी धरती पर उपजल घंसिया सगरो धूम मचल हे।बाबा भोला................ तन भी हरियर मन भी हरियर असन बसन भेल सभे हरियर सगरो हरियर रंग रंगल हे।बाबा भोला...........।                         💐💐💐मनोज💐💐💐

सावधान

सावधान कुत्तों की फौज फिर आनेवाली है हर दरवाजे पर घूम घूम दुम हिलानेवाली है। लाल पीले काले भूरे रंग बिरंगे कुत्ते इनकी कोई जात नहीं होती सिर्फ जमात। लाश ढोकर कोई एक लाता है मिल बैठकर फिर सब खाता है। मूहल्ले मे भौंक भौक कर हमें दिखाता है मरी देखते सब मिल फिर जीभ लपलपाता है। तुम इसकी दीन दशा करुण क्रंदन पर होके कुर्वान दे देते हो अपने घर के हर सदस्य का निवाला दान। सावधान इस बार बिना सोचे समझे मत करना दान                                 💐💐💐मनोज💐💐💐

क्यों रोते हो

क्यों रोते हो जब आ गया फरमान खाली कर दो जल्दी से तुम ये मकान। मैने पहले ही सूचना भिजवाई थी नहीं समझ सके तुम भला मैं क्या करता। रौशनी गुल की पानी बंद किया बाहर का शोर तुम सुन न सको इसका भी प्रतिबंध किया। तूमसे बातचीत बोलचाल सब बंद किया फिर भी तुमने इनसबसे नजरबंद किया। और तो और किराया देना भी बंद किया जो जी मे आया मन भर आनंद किया। फिर भी मैं रहा मौन अब तुमको समझाये कौन। मै एक बार फैसले लेता हूँ पर मौका पहले देता हूँ। ना माने पर कोई जब फरमान भेज देता हूँ तब। अब रोने चिल्लाने से क्या होगा मालिक मैं मकान मेरा इसे छोड़कर जाना होगा।                  💐💐💐मनोज💐💐💐

दस दरवाजे

दस दरवाजे             ********* कल मेरे एक मित्र ने कहा चलो नया मकान लिया हूँ, चलकर देख लो।मित्र मित्र होता है भले ही उसका कथन विचित्र होता है।मैं साथ मे चल पड़ा ।मन मे उत्साह और उमंग था।मित्र के नये मकान को देखने का।लो आ गया।यही तो है मेरा नया मकान,दरवाजे को खोलता अंदर आने का आमंत्रण देता वह मकान के अंदर प्रवेश कर गया।मैं दरवाजे पर ही खड़ा उस मकान को निहारता अपने विचारों मे खोया था कि अचानक मित्र ने मेरी तंद्रा यह कहते हुए भंग की ,अरे तू अभी तक यहीं खड़ा है ,आ चल अंदर चलकर बैठते हैं, गप्पें मारते हैं।       .                      क्या करता पीछे पीछे चल पड़ा।मकान केअंदर जाने पर उसने इसकी खूबियां गिनानी आरंभ कर दी।जानता है इस मकान मे पूरे दस दरवाजे हैं और खिड़कियां सिर्फ दो।लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता ये दो खिड़कियां ही पूरे मकान को रौशन कर देती हैं।दसो दरवाजे से होकर बड़ी अच्छी हवा पूरे घर कोआनंदमय बना देती है।मन को प्रसन्न कर देती है।                                             मैं चुप चाप उसकी बातों को सुन रहा था अब तक।पर अब मुझसे उसका झूठ सहन नहीं हो रहा था।मैने धीरे से उसके मुंह...

बन गये गद्दीनसीन

कुछ तुमने लिया कुछ उसने लिया पर इतना तो बतला दो मुझको क्या दिया? सजदे मैंने भी किये थे तेरी जीत की खातिर तपती दोपहर मे घर से निकलकर बटन दबाये थे। बड़ी मशक्कत से कमल के फूल खिलाये थे मेरे कुछ भाईयों ने पंजे भी दिखाये थे पर मैं तो खुश था कमल की कोमल मुलायम पंखुड़ियों को देखकर । यंत्र तंत्र मंत्र षड्यंत्र सब हो गये फेल क्या यही है राजनीति का खेल? अब समझ में कुछ कुछ आ रहा है शायद कलियुग अपना खेल दिखा रहा है तभी तो जिसने सबकुछ अर्जा उसको मिला दोयम का दर्जा। मातापिता हो गये वृद्धाश्रम के अधीन बच्चे बन गये गद्दीनसीन।                                 💐💐मनोज💐💐

बागी

बागी             ********* जो मैं कहता हूँ सुनो जो मैं कहता हूँ करो जिसे मैं कहता हूँ धरो जिसे मैं कहता हूँ पकड़ो मैंने कहा छोड़ दो तो छोड़ो जितना कहता हूँ उतना बोलो जिसका कहता हूँ राज खोलो नहीं सुनोगे मेरी तुम तो मैं चला क्या कर लोगे मेरा तुम भला मैं विद्वान हूँ बुद्धि सिर्फ मेरे पास है विद्यावान भले नहीं कुटिलता तो खास है मैंने पहले ही कहा था नहीं सुनोगे तो तोड़ दूंगा अपने जैसे दस बीस को जोड़ लूंगा तुम्हारी भावनाओं को मरोड़ दूंगा राजनीति मैं करता हूँ तुम्हें आती कहाँ है कुटिल स्वभाव मेरी तुम्हें भाती कहाँ है स्वतः भाग जाओगे छोड़कर मैंदान जब बार बार करेगा परेशान मेरा शैतान कहलाओगे तुम फिर बागी क्योंकि मेरी तो लगन स्वार्थियों से है लागी तुम रोवोगे चिल्लाओगे शोर मचाओगे फिर खाली हाथ वापस अपने घर को जाओगे नहीं जानते कुल्हाड़ी को नहीं मानते लकड़ी बिन लगे क्या वो पेड़ को हैं काटते इतने के बाद भी क्या बुद्धि तेरी जागी मैं हो गया बागी हाँ मैं तो हो गया बागी।                                     💐💐मनोज💐💐

यह विवाद नहीं

यह विवाद नहीं प्रमाद है मेरे अंतस् मे छिपा अवसाद है लहरें उठती हैं गिरती हैँ टकराती हैं चट्टानों से विक्षिप्त पागलों की तरह क्षणमात्र में होतीं. हैँ विलीन समन्दर के गहरे पानी में चट्टानें रहतीं हैँ स्थिर अडिग निर्विकार।                                      💐💐मनोज💐💐

साहित्य नहीं

साहित्य नहीं मैं पढ़ता हूँ नित नये विचार पर गढ़ता हूँ। ऊंची चाहे जितनी भी हो नित नई इमारत चढ़ता हूँ। जो कुछ भी पाता घर बाहर लाता हूँ झोली भर भर कर। स्वादिष्ट लगे जो रसना को चट पट चट कर जाता हूँ। भूख भले मिटती ना हो पर मन तो तृप्ति पाता है। तन बन जाए दधीचि भले ही मानस को शान्ति दिलाता हूँ। कथनी करनी का भेद नहीं मैं समझ कभी भी पाता हूँ। जो जी मे आता जाता है बस कलमबंद कर जाता हूँ।                   💐💐मनोज💐💐

व्यंग्य करो

व्यंग्य करो या रंग भरो जितना जी मे आये तुम तंग करो बदरंग करो। मैने तो पी ली है भंग सह लूंगा तेरे सारे व्यंग्य नहीं करूंगा तुझको तंग। मिट जाये भले ही अंग अंग चलता आया हूँ चला करूँगा मीत सदा सर्वदा हरदम तेरे संग। सोच भले तेरी बदली मैने रंग नहीं बदला जो मै कल था आज वही हूँ चाहत बस इतनी सी है मिल जाये जीवन को तेरा सत्संग।                       💐💐मनोज💐💐

मैं को मैं की तलाश

मैं !को मैं की तलाश       **************** मैं !मैं को ढूंढ रहा हूँ मां की पवित्र कोख से जन्म लिया पिता की गोद माता कीे आंचल मे पला बेटा कहलाया । बहन ने प्यार दिया दुलारा झगड़े किया भाई ने साथ खेला कुट्टि की फिर भी भाई ही कहलाता रहा। विद्यालय गया पढ़ाई की गुरु ने शिक्षा दी मित्रों ने सहयोग किया हंसी ठिठोली की शिष्य और मित्र बनकर रह गया। बालपन खत्म ,किशोर बने सुन्दर सुशील कन्या ने वरण किया नई पहचान बनी पति की कुछ दिनों बाद पत्नी ने अपने प्यार का प्रतिफल पुत्र को कन्या को जन्म दिया पिता बन गया मैं। परिजनो के भरण पोषण के लिए नौकरी ढूढना आरंभ किया नौकरी मिली नौकर बनकर रह गया। बच्चा बड़ा हुआ पढ़ाया लिखाया उसकी शादी भी कर दी उसके भी बच्चे दादा जी कहने लगे। शरीर थका कमजोर हुआ बिना बताये अचानक बीमारियों ने घेरा डाला काल के दूत लेकर चले गये अपने साथ पहले प्रेत फिर पितर मैं। मैं !मैं को ढूढता ही रहा ढूढता ही रहा।                            💐💐मनोज💐💐

मानव रहे मानव

मानव रहे मानव हमेशा ह्रदय प्रेम रसधार हो चि्त प्रफुल्लित मन दृढ़ मति उदार हो अधिकार हो सहना पड़े गम जितने सही स्वत्व मे हो कम नहीं हो सजग चेतन सहज मानव रहे मानव हमेशा।।                       💐💐मनोज💐💐           💐💐                💐

नमन

मैं नमन निवेदित करता हूँ जगदम्ब तुम्हारी चरणों में। मै जान रहा जग है नश्वर अंतिम में केवल परमेश्वर। मैं शरण तिहारी आया हूँ बस भावपुष्प ही लाया हूँ। स्वीकार करो हे जगदम्बे मै दीन हीन ही आया हूँ। मैंने जाना तू कृपामयी तेरे दर पर है भीड़ बड़ी। उम्मीदें लेकर आया हूँ भर दे झोली हे जगन्मयी। पापों की गठरी लाया हूं कर दूर इसे तू पुण्यमयी। सप्रेम समर्पित करता हूँ अवलंब तुम्हारी चरणों में।                                  शरणागतोहम्                           💐💐मनोज💐💐

अंतःसलिला

अंतःसलिला तेरी यही कहानी ऊपर से है रेत मगर भीतर है पानी सदियों से सहती आई सबकी मनमानी। फिर भी करती उद्धार सदा पितरों का भले कलेजे पर हो बोझ सदा कचरों का। बेगैरत हैं हम जो  जानबूझकर करते हैं नादानी। देवलोक में महिमा तेरी ऋषिगण करते सदा बखान रामाग्रह को मान दिया दशरथ को मुक्तिदान। इसीलिए जगतीतल म़े सब कहते फल्गु महान किया पान जब गौतम ने जल का बन गये बुद्ध महान । गय दानव भी मानव बन फिर किया देह का दान पावन तीर्थ बना तट तेरा पाकर विष्णु का सम्मान।                                        💐💐मनोज💐💐

कर नाटक

बड़े दिनों के बाद जश्नेबहार आई है कर नाटक अब तो मेरी सरकार आई है।। माना कि मैं निठल्ला पप्पू  ठहरा मदद को मेरी पड़ोसन इसबार आई है।। साथ चले न चले मौला जाने पर बांझ लुगाई ने कुल का लाल जाई है।। पर्दानशीं बेगम हरम के भीतर बिस्तरे हम किसके न कोई जान पाया है।। खसम मैं ही हूं इनका अबतक जमाने को हमने सदा यही बताया है।।                                    💐💐मनोज💐💐

सफेद कागज

पन्ने कागज के सफेद ही मिलते हैं काली स्याही से लिखते हैं स्वयम्। भर ले कलम खुद स्याह उसमे कहाँ इतना है दम खम। बेचारी कलम यूँ ही हो जाती है बदनाम लिखना तो मेरी उंगलियों का हे काम। जिसकी कैद में होती हैँ कसी वो कलम सिर्फ आदेश का पालन ही तो करती हैं। अक्षर शब्द सब मेरी ही तो दासी हैं और मैं भी तो दास ही हूँ अपने मन का।                        .           💐💐मनोज💐💐

सिर्फ मैं

कौन कहता है मैं परिस्थितियों का दास हूँ मैं तो निर्माता नियंत्रक हूँ इसका स्वामित्व का इसके मैं ही अधिकारी हूँ जनम से लेकर मरण तक  जीवन के हर चलन तक सांस की हर गति पर सिर्फ और सिर्फ मैं ही मैं।।                                💐💐मनोज💐💐

जीत के जश्न

बनारस में पुल गिरा मन बहुत भारी है पर कर क्या सकते हम उधर जीत के जश्न की तैयारी है। एक तरफ खुशी तो एकतरफ गम दोनो मेरे ही हैं किधर जायें हम। गम का तो काम है आना जाना पर खुशी मिलती मसक्कत से फिर इसे क्यूँ भुलाना। गम भुलाने को तो चंद रुपये का दरकार है पर खुशी की अहमियत है ज्यादा आखिर बनाना मुझको कर्नाटक सरकार है।                                        💐💐मनोज💐💐

सोचिये जरा

सोचिए जरा राह चलते कहीं ओवरब्रिज गिर जाये रेल चलते पटरी की गड़बड़ी के कारण ट्रेन उलट जाये ऊबड़ खाबड़ सड़क के कारण यात्रियों से खचाखच भरी बस पलट जाये सौ दो सौ चार सौ की जान चली जाय हानी नहीं लाभ ही तो होगा मुफलिसी में परिवार मालामाल जो होगा। जिन्दगी भर कमाके पांचलाख कहाँ देखे इस हाल में मरने पर कफन से लेकर किरिया करम तक निःशुल्क खाते में आ गयी मोटी रकम अलग से भला क्यों नहीं जयकार करेगा मुल्क?                                     💐💐मनोज💐💐

कोरे कागज

कोरे कागज ने भी मेरे अक्स को पहचान लिया इसीलिए तो मेरे दर्द को अपने हृदय में स्थान दिया।।                                          💐💐मनोज💐💐

बुड़बक

अरे बुड़बक एकदमे सनक गेलहीं सब खेतवा के तहस नहस कर देमहीं जब जमिनियें न रहतौ त उपजतौ कैसे मौगी घरवा मे मुसकतौ कैसे?                                      💐💐मनोज💐💐

घर के आग

घर बनावे में वर्षों लग जाहे आग ओकरा पल भर में खाक कर देहे लगला पर आग केतनो मारब पानी मिलल हो ओकरा हवा के साथ तू मत कर नादानी। रोक सकब त रोक ल उठल बिन्डोवा के बुत जैतो आग  बच जैतो पानी।                                   💐💐मनोज💐💐

चुनाव का मौसम

लगता है चुनाव का मौसम आ गया है इसीलिए हवा का रूख बदला गया है नेता जी की बदलती चाल देख मौसम का भी मिजाज गड़बड़ा गया है।                                       💐💐मनोज💐💐

कौन कहता है नेता गद्दार होता है

कौन कहता है नेता गद्दार होता है। उस पर तो देश का दारोमदार होता है। गद्दार तो वह समझदार होता है। जिसके हाँथों मे मत का अधिकार होता है। डूब न जाये कश्ती कहीं बीच मजधार में। हाँथों में आपके पतवार होता है।                               💐💐मनोज💐💐

ऐसे नहीं चलेगा

जब भी होता है व्यभिचार हम कहते हैँ मार मार पर कभी भी इस बिन्दु पर आपस में बैठकर नहीं करते कोई ठोस विचार आज जहानाबाद कल धनवाद परसों इलाहाबाद हर दिन कहीं न कहीं हमारी ही बेटी होती है बरबाद ऐसे नहीं चलेगा अब करना होगा शंखनाद क्योंकि इंसानियत हो रही है तार तार दुर्गा लक्ष्मी सरस्वती सब रो रही हैं जार बेजार।                                         💐💐मनोज💐💐

रिश्ते तारतार

वो भैया भैया कह मांगती रही अपने लाज की भीख पर उसने इस पवित्र संबोधन को कर दरकिनार रिश्ते को किया तार तार लगातार वार पर वार।                                       💐💐मनोज💐💐

लुटती अश्मत

वह बेचारी तड़प रही थी अकेली सुनसान सड़क पर भीख मांगती अपने आबरू की एक दो नहीं सात सात दरिंदे जिनके शायद न बेटियां थीं न बहने नोच रहे थे गिद्ध की तरह कतरे कतरे मांस के और मैं कुछ दोस्तों संग मोबाइल से सूट कर रहा था दृश्य लुटती अश्मत का अपनी बहन और बेटी के ।                                    💐💐मनोज💐💐

मजदूर हूँ

आज मजदूर दिवस है लेकिन वह बेचारा आज भी विवश है। साहब के घर शाम को कुछ मेहमान आनेवाले हैं आई.ए.एस.,आई.पी.एस. मुखिया,विधायक,सांसद मंत्री से संतरी तक सब मिलकर जश्न मनानेवाले हैँ आज महकमें के सारे कार्यालय में छुट्टी है सचिवालय के पासवाले दुकान की ठंढी हो रही लिट्टी है बेचारा बुधना लगाये आश बैठा है उदास मैं क्या मैं तो एक मजदूर हूँ अपनी आदत से मजबूर हूँ पेट की आग जब सुबह धधकती है भूल जाता सारे दस्तूर हूँ आज भी कुछ ऐसा ही हुआ साहब के घर आने को मजबूर हूँ क्या करूँ आखिर मैं तो एक विवश मजदूर हूँ।                             सभी सरकारी सहकारी एवं                                   गैर सरकारी मजदूर                                       भाईयों को                                            नमन                                     💐💐मनोज💐💐