नवरात्र महोत्सव में यव रोपण ❤️ ================================= नवरात्रि के प्रथम दिन जो कलश बैठाता है वह अथवा जो कलश न बैठा कर केवल यव उगाता है दोनों भगवतीके द्वारा अभिलषित प्राप्त करतेहैं।कभी कभीपूर्व जीवनके पाप इतने बलिष्ठ होते हैं कि पूजा को ही विफल कर डालतेहैं।विघ्नोंकी प्रबलता होतो उसकी सूचनाअनेक प्रकार से मिलती है जैसे- यव का न उग पाना, रक्षा दीप या अखण्ड दीप का बूझ जाना,कलश का फट जाना, चींटियों, मूषकों द्वारा उत्पात मचाना आदि। यव चाहे कलश के मूल में उगाया जाए या अलग से मिट्टी के पात्र में उसके द्वारा भविष्य की सूचना दी जाती है।मैंने स्वयं अपने अनेक व्यक्तिगत नवरात्रि पूजन में यवों के संदेश को पढा है और उसके प्रतिफल को झेला भी है।अतः यवों के प्रतीक संदेश को यहां शास्त्र की ओर से रखा जा रहा है। अष्टमी और नवमी तिथि को यव अपने चरम उत्कर्ष को प्राप्त करता है।अतः पता चल जाता है कि यह कैसा है।कैसा फल देगा? यदि यव हरित वर्ण का ऊँचा उठे तथा झुके नहीं तो उत्कृष्ट फल देता है।यव के रंग से फल प्राप्ति का आभास होता है। १-- पत्तियाँ काली हों तो उस वर्ष कम वृष्टि होती है। २-- पत्तियाँ धूम्र व...