💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 आओ मित्र वित्तरहित चलें सब मिलकर दीप जलायें उन नरकाधिपतियों के द्वार जिनकी असद्कृपा से आज अँधेरे हैं हमारे घर द्वार एक दीप जलायें उनके दरबारियों के द्वार जिनके दम पर फूट रहे पटाखे जल रहीं फुलझड़ियाँ नरकाधिपतियों के द्वार एक दीप जलायें उन तथाकथित हमारे यूनियन लीडरों के द्वार जिनके दम पर फल फूल रहे नरकाधिपतियों के कारोबार दमघोंट कर हमारे बच्चों का गला आज मिठाईयां बाँट रहे मना रहे जश्न मुबारक हो उन्हें भी यह दीपों का जगमग त्यौहार हमारा क्या हमारे बच्चों का क्या हम तो आदी हो चुके सिसकने को कलपने को आह भरने को होली हो,दशहरा हो या हो फिर दीपों का त्यौहार कल भी थे आज भी हैं आगे भी रहेंगे ऐसे ही बेबस और लाचार चाहे किसी की हो बनी सरकार।। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 @*************पद्मनाभ।