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Showing posts from July, 2021

बग्लामुखी प्रयोग।

बगलामुखी देवी के 4 विशेष दुर्लभतम मंत्र मां बगलामुखी देवी के समस्त मंत्र दुर्लभतम हैं। इन मंत्रों के प्रयोग भी अन्य प्रयोग से जरा हटकर होते हैं। आइए डालें एक नजर प्रमुख मंत्रों पर....    मां बगलामुखी का विशेष मंत्र    ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै सर्व दुष्टानाम वाचं मुखं पदम् स्तम्भय जिह्वाम कीलय-कीलय बुद्धिम विनाशाय ह्लीं ॐ नम:    इस मंत्र से सभी काम्य प्रयोग संपन्न किए जाते हैं।      जैसे...    मधु, शर्करा युक्त तिलों से होम करने पर मनुष्य वश में होते है।   मधु, घृत तथा शर्करा युक्त लवण से होम करने पर आकर्षण होता है।   तेल युक्त नीम के पत्तों से होम करने पर विद्वान बनते हैं।   हरिताल, नमक तथा हल्दी से होम करने पर शत्रुओं का स्तम्भन होता है। कैसे करते हैं मां बगलामुखी का तांत्रिक प्रयोग, पढ़ें संपूर्ण विधि   मां बगलामुखी का भयनाशक मंत्र   अगर आप किसी भी व्यक्ति वस्तु परिस्थिति से डरते हैं और अज्ञात डर सदा आप पर हावी रहता है तो देवी के भय नाशक मंत्र का जाप करना चाहिए…   ॐ ह्लीं ह्लीं ह्लीं बगले सर्व भयं हर:...

सत्यनारायण कथा में सामाजिक संगठन के सूत्र।

सत्यनारायण कथा में सामाजिक संगठन के सूत्र। ********************** यूँ तो हम सभी अपने घरों में मासिक पूर्णिमा को सत्यनारायण व्रत का विधान करते हैं।सत्यनारायण रूप भगवान विष्णु की उपासना कर कथाश्रवण वा वाचन भी करते हैं।किंतु प्रथमोध्यायतः सप्तमोध्याय वा पंचमोध्याय पर्यंत ब्राह्मण, बनिया ,राजा आदि प्रतीकों की कथामात्र है यह।क्या यह एक मासिक बैठकी या कथासुनकर पंचामृत एवं अन्य भोगपदार्थों के सेवन कर निज निज गृह जाहु भर है!आईये अपनी विचारणाशक्ति से दृष्टिपात करते हैं। कथारंभ कलिकाल में लोगों के कष्ट निवारण हेतु ऋषियों की संगोष्ठी से होता है।पुनः नारद विष्णु संवाद का क्रम जहाँ सत्यनारायण पूजा का विधान एवं स्वरूप को वर्णित किया जाता है।अब इसके आगे की कथा एक गरीब ब्राह्मण के द्वारा सत्यनारायण की उपासना से आरंभ हो साधु नामक वैश्य से विस्तार पाआगे.. राजा एवं यदुवंशियों तक पहुचती है।इस पूरे कथाप्रकरण में ध्यातव्य यह कि कथा कभी भी किसी एक अकेले के द्वारा सम्पन्न नहीं होती।जिसने भी की अपने इष्टमित्रों परिजनों को आमंत्रण देकर ही सबके साथ मिलकर की।सर्वप्रथम वह ब्राह्मण जो अतिनिर्धन है ।जीवोपार्जन हेतु ...

लोकस्तदनुवर्तते।

लोकस्तदनुवर्तते। प्रत्येक श्रेष्ठ मनुष्य ही अनुकरणीय होता है।जनसामान्य उसका ही अनुकरण करते हैं।श्रेष्ठता की पहचान उसकी भाषा,बोली,भाव,समाजोपयोगी क्रियाकलाप ,वाणी की सौम्यता ,अपने से श्रेष्ठ जनों के प्रति सम्मान का भाव एवं कथनी करनी में समानता से होती है।कारण यह है कि सामाजिक जन उस श्रेष्ठ पुरुष का ही अनुकरण करते हैं।दुराग्रही,दुराचारी, दंभी,लंपट,मिथ्याभाषी, लोभी,अतिवाचाल,श्रेष्ठजनों ,विद्वानों के बीच अपनी थोथी दलील से अपनी महानता सिद्ध करने वाला ,दुराचारी, बेवजह दूसरों पर दोष मढ़नेवाला ,सामाजिक होने का स्वांग भरने वाला कभी भी सामाजिकों की दृष्टि में श्रेष्ठ की श्रेणी को प्राप्त नहीं करता।दिन रात जो अपने को महान और दूसरों को निम्नस्तरीय बताने की कोशिश में लगा रहता हो उसे कभी भी समाज श्रेष्ठता की श्रेणी में स्वीकार नहीं कर सकता।अतः स्पष्ट है कि श्रेष्ठता की श्रेणी में स्थान पाने के लिये हमें सदैव विनम्र,दंभहीन,सौम्यभाषी,क्रियाशील, सन्मार्गी, बोधगम्यतादि जैसे आचरणो से युक्त होना होगा।हमारे शास्त्रों में निहित तत्वों को समझकर यथासाध्य अपने व्यवहार में लाना होगा।योगीराज श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भग...

संस्कृतस्य महिमा।

रोचक जानकारी...पूरी पोस्ट पढ़ें..👌 अंग्रेजी में 'THE QUICK BROWN FOX JUMPS OVER A LAZY DOG' एक प्रसिद्ध वाक्य है। कहा जाता है कि इसमें अंग्रेजी वर्णमाला के सभी अक्षर समाहित कर लिए गए , जबकि यदि हम ध्यान से देखे तो आप पायेंगे कि , अंग्रेजी वर्णमाला में कुल 26 अक्षर ही उपलब्ध हैं, जबकि उपरोक्त वाक्य में 33 अक्षर प्रयोग किये गए हैं, जिसमे  चार बार O का प्रयोग A, E, U तथा R अक्षर के क्रमशः 2 बार प्रयोग दिख रहे हैं ।अपितु अक्षरों का क्रम भी सही नहीं है। आप किसी भी भाषा को उठा के देखिए, आपको कभी भी संस्कृत जितनी खूबसूरत और समृद्ध भाषा देखने को नहीं मिलेगी । संस्कृत वर्णमाला के सभी अक्षर एक श्लोक में व्यवस्थित क्रम में देखने को मिल जाएगा               क:खगीघाङ्चिच्छौजाझाञ्ज्ञोSटौठीडढण:।               तथोदधीन पफर्बाभीर्मयोSरिल्वाशिषां सह।। अनुवाद -  पक्षियों का प्रेम, शुद्ध बुद्धि का, दूसरे का बल अपहरण करने में पारंगत, शत्रु-संहारकों में अग्रणी, मन से निश्चल तथा निडर और महासागर का सृजन कर्ता कौन? राजा मय कि जिस...

दशरथ का मुकुट।

राजा दशरथ के मुकुट का एक अनोखा राज, पहले कभी नही सुनी होगी यह कथा आपने !!!!!!!!!! अयोध्या के राजा दशरथ एक बार भ्रमण करते हुए वन की ओर निकले वहां उनका समाना बाली से हो गया। राजा दशरथ की किसी बात से नाराज हो बाली ने उन्हें युद्ध के लिए चुनोती दी। राजा दशरथ की तीनो रानियों में से कैकयी अश्त्र शस्त्र एवं रथ चालन में पारंगत थी। अतः अक्सर राजा दशरथ जब कभी कही भ्रमण के लिए जाते तो कैकयी को भी अपने साथ ले जाते थे इसलिए कई बार वह युद्ध में राजा दशरथ के साथ होती थी। जब बाली एवं राजा दशरथ के मध्य भयंकर युद्ध चल रहा था उस समय संयोग वश रानी कैकयी भी उनके साथ थी। युद्ध में बाली राजा दशरथ पर भारी पड़ने लगा वह इसलिए क्योकि बाली को यह वरदान प्राप्त था की उसकी दृष्टि यदि किसी पर भी पद जाए तो उसकी आधी शक्ति बाली को प्राप्त हो जाती थी। अतः यह तो निश्चित था की उन दोनों के युद्ध में हर राजा दशरथ की ही होगी। राजा दशरथ के युद्ध हारने पर बाली ने उनके सामने एक शर्त रखी की या तो वे अपनी पत्नी कैकयी को वहां छोड़ जाए या रघुकुल की शान अपना मुकुट यहां पर छोड़ जाए। तब राजा दशरथ को अपना मुकुट वहां छोड़ रानी कैकेयी के साथ ...