केश का पक जाना
चेहरे पर झुर्रियों का आना
शरीर के चमड़ी का लटक जाना
आँखों की रोशनी का कम हो जाना
आवाज की गति का धीमा हो जाना
चाल की गति में ठहराव का आना
कार्य करने की क्षमता में कमी
उपदेशपरक बातों का वाचन
घर की दहलीज तक दुनिया को समेट लेना
बीते जीवन की चर्चा में मशगूल
पर कभी किसी से ये नहीं कहना
कि मैं अब बूढ़ा हो गया हूँ
यही तो वार्धक्य है
ऐसे स्वरूप को देखकर ही
मन में श्रद्धा ,दया,और
विनम्रता का भाव यदि मन में
आ जाये तो समझो सचमुच
उसे वार्धक्य की प्राप्ति हो गई
क्योंकि वह कभी भी अपनी
उम्र का अहसास खुद से
आपको नहीं कराता
उसके कर्म बोलते हैं
उसका चेहरा बोलता है
उसकी बाहर आ गई हड्डियाँ बोलती हैं
उसकी चाल बोलती है
उसके हाव भाव बोलते हैँ
और उसके जीवन जीने का अंदाज
बोलता है कि अब यह उम्र के उस
पड़ाव पर है जिसे
वार्धक्य कहते हैँ
उसके वाणी की सौम्यता
बोलती है कि अब इसने
प्राप्त कर लिया है वार्धक्य।।
💐💐💐मनोज💐💐💐
रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"
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