आखिर मैं कहाँ हूँ? **************** सम्पूर्ण बंदी का एक लंबा दौर।छोटे मँझले बड़े सभी शिक्षण संस्थान बंद।बड़े मँझोले छोटे सभी कारोबार ठप।सरकारी गैर सरकारी सभी प्रतिष्ठान भी बंद।हर प्रकार के धार्मिक स्थलों में भी ताले लटका दिये गये,राजनीति के मंदिर भी बंद,सभी विधायक, सांसद,मंत्री अपने अपने क्षेत्र में ही रहकर अपने ही घर से अपने दायित्व का निर्वहन करेंगे।सबके सामने जीवन यापन ,परिवार के भरण पोषण की विकट समस्या। सरकारी स्तर पर समस्या का निदान....... 💐सरकारी कर्मचारियों का वेतन भुगतान नियमित होता रहेगा। 💐मजदूरों को राशन के साथ नगद राशि प्रदान करने का प्रावधान। 💐सभी विधायकों, सांसदों, मंत्रियों को पूर्व से निर्धारित वेतन भत्तों में पहले वृद्धि फिर कुछ कटौती कर ससमय राशि का भुगतान। ध्यातव्य......... समाज के शेष तबकों में दो विशेष तबके मंदिरों के वे पुजारी या दैनिक पूजन व्यवस्था में संलग्न ब्राह्मण जिनका आधार सिर्फ मंदिरों में आये दर्शनार्थियों या अपने यजमानों के कल्याणार्थ अनुष्ठान से प्राप्त आय ही था।इसी से उनका एवं उनके आश्रितों का भरण पोषण हुआ करता था।आज सम्पूर्ण बंदी में इनकी आय भी बंद और...