सिद्धकुंजिका विधान ब सिद्धि साधना सिखने के लिए https://chat.whatsapp.com/Hh4QXmmOvpL85kYhhYgrUz भगवान शिव ने पार्वती से कहा है कि दुर्गा सप्तशती के संपूर्ण पाठ का जो फल है वह सिर्फ कुंजिकास्तोत्र के पाठ से प्राप्त हो जाता है। कुंजिकास्तोत्र का मंत्र स्वयंसिद्ध है इसलिए इसे सिद्ध करने की जरूरत नहीं है। रमा के अनुसार जो साधक संकल्प लेकर इसके मंत्रों का जप करते हुए दुर्गा मां की आराधना करते हैं मां उनकी इच्छित मनोकामना पूरी करती हैं। इसमें ध्यान रखने योग्य बात यह है कि कुंजिकास्तोत्र के मंत्रों का जप किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं करना चाहिए। किसी को क्षति पहुंचाने के लिए कुंजिकास्तोत्र के मंत्र की साधना करने पर साधक का खुद ही अहित होता है। इसके द्वारा आज्ञा चक्र का जागरण होता है इसमें आज्ञा चक्र के बीजो अक्षरों का समावेश है और अद्भुत तरीके से मूलाधार चक्र और कुण्डलिनी जागृत करने के सभी बीज अक्षर मंत्रो का उल्लेख है । विनियोग : ॐ अस्य श्री कुन्जिका स्त्रोत्र मंत्रस्य सदाशिव ऋषि: । अनुष्टुपूछंदः । श्रीत्रिगुणात्मिका देवता । ॐ ऐं बीजं । ॐ...