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Showing posts from March, 2021

रुद्राक्ष।

रुद्राक्ष के महत्व, लाभ और धारण विधि । एक मुखी रुद्राक्ष इसके मुख्य ग्रह सूर्य होते हैं। इसे धारण करने से हृदय रोग, नेत्र रोग, सिर दर्द का कष्ट दूर होता है। चेतना का द्वार खुलता है, मन विकार रहित होता है और भय मुक्त रहता है। लक्ष्मी की कृपा होती है।* दो मुखी रुद्राक्ष मुख्य ग्रह चन्द्र हैं यह शिव और शक्ति का प्रतीक है मनुष्य इसे धारण कर फेफड़े, गुर्दे, वायु और आंख के रोग को बचाता है। यह माता-पिता के लिए भी शुभ होता है। तीन मुखी रुद्राक्ष मुख्य ग्रह मंगल, भगवान शिव त्रिनेत्र हैं। भगवती महाकाली भी त्रिनेत्रा है। यह तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करना साक्षात भगवान शिव और शक्ति को धारण करना है। यह अग्रि स्वरूप है इसका धारण करना रक्तविकार, रक्तचाप, कमजोरी, मासिक धर्म, अल्सर में लाभप्रद है। आज्ञा चक्र जागरण (थर्ड आई) में इसका विशेष महत्व है। चार मुखी रुद्राक्ष चार मुखी रुद्राक्ष के मुख्य देवता ब्रह्मा हैं और यह बुधग्रह का प्रतिनिधित्व करता है इसे वैज्ञानिक, शोधकर्त्ता और चिकित्सक यदि पहनें तो उन्हें विशेष प्रगति का फल देता है। यह मानसिक रोग, बुखार, पक्षाघात, नाक की बीमारी में भी लाभप्रद है। पांच म...

वो मिल गये।

एक संतरास पत्थर के टुकड़े को तरास कर शिव बना देता है जो कभी किसी का सर फोड़ते थे एक खरीददार उस शिव के अंदर नक्काशी की बारीकियाँ तलाश मोल भाव करता है जिसने कभी उस पत्थर से किसी का सर फोड़ा था अंतर बस तलाश की है संतरास को पत्थर में तलाश थी शिव की  वो मिल गये। .....मनोज कुमार मिश्र '"पद्मनाभ"।

अब जिआ धड़के मोरा।

आ गेलै फागुन महिनमा  होअब जिआ धड़के मोरा। लाल लाल टेशु के फुलवा फुलयलै खेतवा में सगरे सरसो गंधैलै बूट साथे मटरो के दाना गदरैलै झूम झूम अलसी लेलक परनमा  हो अब जिआ धड़के मोरा। भोरे भोरे काँपे ला थर थर देहिया होते दुपहरी जगावे धूप नेहिया साँझे के आलस लावे ला पछिया रात के सतावे ला पिया के सपनमा हो अब जिआ धड़के मोरा। सास ननदिया मार हयी ताना गोतनी न छोड़ हयी आँख देखाना भैंसुर ससुर भी खोज हयी बहाना देवरा भी ढूँढ़ हयी मिले के बहनमा हो अब जिआ धड़के मोरा। राते सेजरिया सूना लागे रहे रहे निंदिया रोजे जगावे निर्मोही के पतियो न आवे कस मस करे बदनमा हो अब जिआ धड़के मोरा। आ गेलै फागुन महिनमा हो अब जिआ धड़के मोरा। .....मनोज कुमार मिश्र "पद्मनाभ"।

संस्कृत।

संस्कृत  संस्कृत में 1700 धातुएं, 70 प्रत्यय और 80 उपसर्ग हैं, इनके योग से जो शब्द बनते हैं, उनकी संख्या 27 लाख 20 हजार होती है। यदि दो शब्दों से बने सामासिक शब्दों को जोड़ते हैं तो उनकी संख्या लगभग 769 करोड़ हो जाती है। संस्कृत इंडो-यूरोपियन लैंग्वेज की सबसे प्राचीन भाषा है और सबसे वैज्ञानिक भाषा भी है। इसके सकारात्मक तरंगों के कारण ही ज्यादातर श्लोक संस्कृत में हैं। भारत में संस्कृत से लोगों का जुड़ाव खत्म हो रहा है लेकिन विदेशों में इसके प्रति रुझाान बढ़ रहा है। ब्रह्मांड में सर्वत्र गति है। गति के होने से ध्वनि प्रकट होती है। ध्वनि से शब्द परिलक्षित होते हैं और शब्दों से भाषा का निर्माण होता है। आज अनेकों भाषायें प्रचलित हैं। किन्तु इनका काल निश्चित है कोई सौ वर्ष, कोई पाँच सौ तो कोई हजार वर्ष पहले जन्मी। साथ ही इन भिन्न भिन्न भाषाओं का जब भी जन्म हुआ, उस समय अन्य भाषाओं का अस्तित्व था। अतः पूर्व से ही भाषा का ज्ञान होने के कारण एक नयी भाषा को जन्म देना अधिक कठिन कार्य नहीं है। किन्तु फिर भी साधारण मनुष्यों द्वारा साधारण रीति से बिना किसी वैज्ञानिक आधार के निर्माण की गयी सभी भाषाओ...