सावधान कुत्तों की फौज फिर आनेवाली है
हर दरवाजे पर घूम घूम दुम हिलानेवाली है।
लाल पीले काले भूरे रंग बिरंगे कुत्ते
इनकी कोई जात नहीं होती सिर्फ जमात।
लाश ढोकर कोई एक लाता है
मिल बैठकर फिर सब खाता है।
मूहल्ले मे भौंक भौक कर हमें दिखाता है
मरी देखते सब मिल फिर जीभ लपलपाता है।
तुम इसकी दीन दशा करुण क्रंदन पर होके कुर्वान
दे देते हो अपने घर के हर सदस्य का निवाला दान।
सावधान इस बार बिना सोचे समझे मत करना दान
💐💐💐मनोज💐💐💐
रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"
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