आज मजदूर दिवस है
लेकिन वह बेचारा
आज भी विवश है।
साहब के घर शाम को
कुछ मेहमान आनेवाले हैं
आई.ए.एस.,आई.पी.एस.
मुखिया,विधायक,सांसद
मंत्री से संतरी तक सब
मिलकर जश्न मनानेवाले हैँ
आज महकमें के सारे
कार्यालय में छुट्टी है
सचिवालय के पासवाले
दुकान की ठंढी हो रही लिट्टी है
बेचारा बुधना लगाये आश
बैठा है उदास
मैं क्या मैं तो एक मजदूर हूँ
अपनी आदत से मजबूर हूँ
पेट की आग जब सुबह धधकती है
भूल जाता सारे दस्तूर हूँ
आज भी कुछ ऐसा ही हुआ
साहब के घर आने को मजबूर हूँ
क्या करूँ आखिर मैं तो
एक विवश मजदूर हूँ।
सभी सरकारी सहकारी एवं
गैर सरकारी मजदूर
भाईयों को
नमन
💐💐मनोज💐💐
रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"


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