करता हूँ मैं नमन तुम्हारी माँ गंगे स्वीकार करो
उद्धार किया है सगर तनय का मेरा बेड़ा पार करो।।
शिव की जटा से बहनेवाली विष्णुचरण में वास किया
दीन दुखी पापी प्राणी.हो सबका बेड़ा पार किया।।
पान किया अनुपान किया स्पर्श किया स्नान किया
नाम लिया फिर तर गये चाहे श्रद्धा का ही दान
दिया।।
भूलोक नही है भुवर्लोक तक महिमा तेरी न्यारी
गाते हैं सब ऋषिगण मिलकर मैं जाऊँ तेरी बलिहारी।।
अवतरण दिवस तेरा है माता बलि बलि जाऊँ हे जगत्राता
तर जाता है भवसागर से सानिध्य तेरा जो पाता।।
सुन ले पुकार कर क्षमादान हूँ सुत तेरा नादान
पुत्र कुपुत्र भले हो जग में माता होती सदा महान।।
🎂🎂नमामि गंगे🎂🎂
💐💐मनोज💐💐
रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"
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