अंतःसलिला तेरी यही कहानी
ऊपर से है रेत मगर भीतर है पानी
सदियों से सहती आई सबकी मनमानी।
फिर भी करती उद्धार सदा पितरों का
भले कलेजे पर हो बोझ सदा कचरों का।
बेगैरत हैं हम जो जानबूझकर करते हैं नादानी।
देवलोक में महिमा तेरी ऋषिगण करते सदा बखान
रामाग्रह को मान दिया दशरथ को मुक्तिदान।
इसीलिए जगतीतल म़े सब कहते फल्गु महान
किया पान जब गौतम ने जल का
बन गये बुद्ध महान ।
गय दानव भी मानव बन फिर किया देह का दान
पावन तीर्थ बना तट तेरा पाकर विष्णु का सम्मान।
💐💐मनोज💐💐
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