मैं नमन निवेदित करता हूँ
जगदम्ब तुम्हारी चरणों में।
मै जान रहा जग है नश्वर
अंतिम में केवल परमेश्वर।
मैं शरण तिहारी आया हूँ
बस भावपुष्प ही लाया हूँ।
स्वीकार करो हे जगदम्बे
मै दीन हीन ही आया हूँ।
मैंने जाना तू कृपामयी
तेरे दर पर है भीड़ बड़ी।
उम्मीदें लेकर आया हूँ
भर दे झोली हे जगन्मयी।
पापों की गठरी लाया हूं
कर दूर इसे तू पुण्यमयी।
सप्रेम समर्पित करता हूँ
अवलंब तुम्हारी चरणों में।
शरणागतोहम्
💐💐मनोज💐💐
रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"
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