कुछ तुमने लिया
कुछ उसने लिया
पर इतना तो बतला दो
मुझको क्या दिया?
सजदे मैंने भी किये थे
तेरी जीत की खातिर
तपती दोपहर मे घर से
निकलकर बटन दबाये थे।
बड़ी मशक्कत से कमल के
फूल खिलाये थे
मेरे कुछ भाईयों ने पंजे भी
दिखाये थे पर मैं तो खुश था
कमल की कोमल मुलायम
पंखुड़ियों को देखकर ।
यंत्र तंत्र मंत्र षड्यंत्र
सब हो गये फेल
क्या यही है राजनीति का खेल?
अब समझ में कुछ कुछ आ रहा है
शायद कलियुग अपना खेल दिखा रहा है
तभी तो जिसने सबकुछ अर्जा
उसको मिला दोयम का दर्जा।
मातापिता हो गये वृद्धाश्रम के अधीन
बच्चे बन गये गद्दीनसीन।
💐💐मनोज💐💐
रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"
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