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समवेत आयुः ।

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐समवेत आयुः उत्सवः।💐
अर्थात् सम्पूर्ण जीवन में "क्षेत्रे क्षेत्रे धर्मम् कुरु"का अनुपालन करते हुये जीवन को उत्सवमय बनाना चाहिये।अब प्रश्न यह कि धर्म है क्या?हम तो प्रतिदिन मंदिर जाते हैं,मस्जिद जाते हैं,गुरुद्वारा जाते हैं,गिरजा जाते हैं,वहाँ प्रार्थना करते हैं,नमाज अता करते हैं,अरदास करते हैं,प्रेयर करते हैं ।धर्म तो कर ही रहे ह़ै।शिखा रखते ह़ै ,त्रिकाल स़ंध्या करते हैं,च़दन लगाते हैं,भगवान की आरती करते हैं,प्रसाद भोग अर्पित करते हैं।पाँचों वक्त नमाज अता करते हैं।सबद कीर्तन करते हैं।बाईबिल की आयतों का पाठ करते हैं।हम धर्म नहीं कैसे करते।यही तो धर्म है।पर मैं कहता हूँ यह धर्म नहीं यह तो धर्म की पूर्व पीठिका है।क्योंकि धर्म की वैयाकर्णिक व्याख्या करेंगे तो "धृ धारणे धातु"से निष्पन्न धर्म धारण करने को कहा गया है।अर्थात् पूर्व पीठिका के क्रम में जो अनुभूतियां हमें प्राप्त होती हैं उन्हें अपने आपमें आत्मसात कर तदनुसार आचरण ही वास्तव में धर्म है।इसीलिये शायद धर्म को रूढ़ नहीं करते हुये इसे विस्तृत फलक पर बिखेरा गया,जीवन को समवेत करते हुये "क्षेत्रे क्षेत्रे धर्मम् कुरु"का आदेश जगत्गुरू श्रीकृष्ण के द्वारा जीवमात्र के हितार्थ दिया गया।हम यदि इस आलोक में जीवन को सँवारने लग जायें तो हमारा जीवन अवश्य ही सफलता के सोपान पर अग्रणी होगा।
@पद्मनाभ*******
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रावण का काम तमाम।

रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण  नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम  होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"

टोटके।

*🥦तांत्रोत्क वनस्पति टोटके🥦* 🕉️🏹🚩🔔🐚📿🔱 छोटे-छोटे उपाय हर unघर में लोग जानते हैं, पर उनकी विधिवत् जानकारी के अभाव में वे उनके लाभ से वंचित रह जाते हैं।हमारे आसपास पाए जाने वाले विभिन्न पेड़-पौधों के पत्तों, फलों आदि का टोटकों के रूप में उपयोग भी हमारी सुख-समृद्धि की वृद्धि में सहायक हो सकता है। यहां कुछ ऐसे ही सहज और सरल उपायों का उल्लेख प्रस्तुत है, जिन्हें अपना कर पाठकगण लाभ उठा सकते हैं। ♦बिल्व पत्र : अश्विनी नक्षत्र वाले दिन एक रंग वाली गाय के दूध में बेल के पत्ते डालकर वह दूघ निःसंतान स्त्री को पिलाने से उसे संतान की प्राप्ति होती है। ♦अपामार्ग की जड़ : अश्विनी नक्षत्र में अपामार्ग की जड़ लाकर इसे तावीज में रखकर किसी सभा में जाएं, सभा के लोग वशीभूत होंगे। ♦नागर बेल का पत्ता : यदि घर में किसी वस्तु की चोरी हो गई हो, तो भरणी नक्षत्र में नागर बेल का पत्ता लाकर उस पर कत्था लगाकर व सुपारी डालकर चोरी वाले स्थान पर रखें, चोरी की गई वस्तु का पला चला जाएगा। ♦संखाहुली की जड़ : भरणी नक्षत्र में संखाहुली की जड़ लाकर तावीज में पहनें तो विपरीत लिंग वाले प्राणी आपसे प्रभावित होंगे। ♦आक की जड़ :...

कैसे उसे बुलाऊँ मैं

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