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अपना तो उसूल है।

अपना तो उसूल है 
अपनो के लिये कुछ
करते रहना
आप मानो या न मानो
मेरे मन को जानो या न जानो
बिना सोंचे बिना समझे मुझको तो
आता बस आगे बढ़ते रहना
जरूरी नहीं जो मैं सोचूँ
आपकी सोंच भी माकूल हो
रास्ते अपने अपने सोंच अपनी
फिर साथ चलने के कैसे सपने
गर ठान लिया है चलने को साथ साथ
फिर तो देना होगा हाँथ में हाँथ
मान लिया है दिल से अगर अपना
बंद करो फिर देखना कोई अन्य सपना
तेरे सपने भी वही होंगे 
जिसे देखे सिर्फ अपने होंगे
दिल का मिलना किसी से एक बार होता है
इस मिलन का आधार केवल एतवार होता है
न हो एतवार तो मिलन बेकार होता है
बिखरने का बहाना तो सौ सौ बार होता है
खुला आसमान खुला जहान यहाँ
आज हम यहाँ कल तुम कहाँ
बस एक बार सी लो होंठों को
दफन कर दो गिले सारे 
बहारें आयेंगी चमन खिल उठेगा
महकेगी बगिया गुलाब की महक से।।
@*******पद्मनाभ💐💐💐💐💐💐💐💐

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रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण  नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम  होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"

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