भाषा
भाव
अदब
सब
हो
रहे हैं
बे अदब
इन दिनो
किसी से
बात करना
मुनासिब नहीं
बाअदब
भूल गये हैं
ककहरा
संस्कारों के
पहाड़ा सुविचारों के
अब तो याद भी नहीं
दादा जी की वह सूक्ति
अभिवादन शीलस्य नित्यम् वृद्धोपसेविनः
चत्वारि तस्य वर्द्धंते आयुःविद्या यशो बलम्।।
पता नहीं यह पछिया हवा है
या पूर्वी बयार की आँधी।।
@💐💐💐पद्मनाभ****
Comments
Post a Comment