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चुनावी चर्चा।

चुनावी चर्चा।
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मैंने सोंचा चलो आज कर लेता हूँ बैठे बिठाये कुछ चुनावी चर्चा/क्योंकि इसमें होना नहीं है जेब से कुछ खर्चा/कुछ इधर से कुछ उधर से मिल जायेंगे मशाले/समय कट जायेगा बैठे ठाले/तो आइये शुरु करते हैं/हम नाम किसी भी प्रत्याशी का नहीं धरते हैं/बस  देश के चंद कर्णधारों के क्रियाकलापों को पढ़ते  हैं/इसी बहाने चर्चा को लेकर आगे बढ़ते हैं/
एक तथाकथित भावी कर्णधार से जनता जनार्दन ने पूछा श्री मान अब तक की सामाजिक उपलब्धि बतायें हमें अपनी/ताकि फोड़ सकें हम भी आपके नाम की ढकनी/माननीय ने कहा जनाब पहले आप करना सीखें हमारा सम्मान /भले मैंने आपका वर्षों किया है अपमान/किन्तु अब तो जाग चुका है हमारा सोता ज्ञान/मेरी उपलब्धि सुनकर आप रह जायेंगे अचंभित/मैं इसे कहते हुये हूँ आपके बीच दंभित/सबसे पहली उपलब्धि मेरी माँ रह चुकी है विधाईका पिता रहे हैं सांसद/इसीलिये हक मेरा बनता है तू जान/हो तैयार अब करने को मेरा सम्मान/दूसरी भी बताता हूँ यह तो था ट्रेलर पिक्चर अभी बाकी है/मेरे परिजनों के द्वारा किये गये क्रिया कलाप क्या नहीं जानते आप/ उन्होंने धारण किया था खादी/मैं हूँ आज भगवा बुनियादी/जरूरत महसूश होने पर कल को कोई और वेश करूँगा धारण/बन जाऊँगा हाथ जोड़कर चुनाव के समय फिर से आपका चारण/भले आप मुझे नहीं पहचानते नहीं जानते/लेकिन मैं तो पूरे चुनाव तक आपको जानता हूँ पहचानता हूँ तहे दिल से मानता हूँ कि अपना मत आप मुझे ही देंगे क्योंकि मजबूरी है आपकी/आखिर देश को बचाना है तो मुझे ही सांसद बनाना है/बस आज भर मान लें आप बात मेरी /कल मैं कहाँ मिल पाऊंगा आपसे छोड़कर अपनी कुर्सी प्यारी/
आज मैं जो कह रहा हूँ सबकुछ निभाऊँगा/पर संसद के शोर में शायद भूल जाऊँ इसलिये किये वादों को न हीं निभाऊँगा/मजबूरी होगी मेरी प्यार में कुर्सी को निभाना/आपके इतने मिहनत मशक्कत से मिली जीत को भुलाना/ठीक है आज इतना ही बोल पाऊंगा क्योंकि आगे भी जाना है/कल मूर्ख दिवस के अवसर को भी जनता जनार्दन से भँजाना है/तब तक के लिये जय श्री राम/आप सब भी अब देखिये मेरे इलेक्शन का काम/
💐💐💐💐💐💐💐💐@पद्मनाभ*******

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