अपने आंगन में आज देखा
गमले में खिले गुलाब के तीन फूल
मन प्रसन्न चित्त आह्लाद से परिपूर्ण हो गया।
इन खिले फूलों की पंखुड़ियों को
खुलकर कली से फूल की शक्ल धारण करते
देखता रहा हूँ पिछले कै दिनों से हर दिन
हर पल प्रतिपल पल पल।
आज खुश हूँ इसके खिले सँवरे
सजे खिलखिलाते रूप को देखकर
पर सोंचने लगा आखिर खिले तो तीन ही
क्यो?
मन ने मनन किया
चित्त ने चिंतन किया
मस्तिष्क के मंथन के बाद
परमात्मा की प्रेरणा से आत्मा
ने आवाज दी सत्व रज तम
को भेद कर ही तो मन प्रसन्न हो
खिलखिलाता है ठहाके लगाता है
खुद भी हँसता है जग को भी हँसाता है
इसी खिले गुलाब की तरह काँटों से ऊपर रहकर।
💐💐💐💐💐@पद्मनाभ💐💐💐💐💐
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