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माँ।

माँ।
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माँ तो बस माँ होती है
जिसके कदमों में सारा जहाँ होती है
हो जाये भले मति क्षीण
नजरों की रौशनी हीन
फिर भी बेटे के कदमों की आहट सुन
दिल परेशाँ होती है हाँ
माँ तो बस माँ होती है
नजरें नजारों से भले बेनूर होती हैं
पर संतानों के स्पर्श में कोहिनूर होती हैं
एक बार बस मिल जाये स्पर्श ममता का
क्या कहने दुःखों का दर्द सब दूर होती हैं
हाँ माँ तो बस माँ होती है
कहना बड़ा आसान होता है
निभाना होता है कठिन
क्योंकि वह माँ होती है 
जो दिन बिताती है पल पल गिन गिन
रातों को निहारती आसमां तारों को गिन गिन
उम्र होती जाती है क्षीण
हड्डियां होती अतिदीन
जुबाँ भी लड़खड़ाती है
फिर भी  अमरत्व काआशीष देती है
हाँ माँ तो बस माँ होती है।
कुपुत्रो जायेत
क्वचिदपि कुमाता न भवति
गलत नहीं कहते हैं यती
माँ के कदमों में दिखती है 
इसकी प्रत्यक्ष परिणति
मातृ चरण रज धारण में ही है सद्गति
जिसने भी इसका परित्याग किया
पाया है वह दुर्मति दुर्गति 
वह तो स्नेह आगार होती है
हाँ माँ तो सिर्फ माँ होती है।।
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                  💐💐@पद्मनाभ💐💐

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