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कब्जियत।

कब्जियत।
मित्रों कब्जियत एक ऐसी बीमारी है जो कितने ही बिमारियों को जन्म देती है।जैसे पेट फुलना,गैस होना,अफारा,डमारा,सर चकराना ,उल्टी की शिकायत होना आदि आदि।जब एक कब्जियत के कारण इतनी सारी बीमारियों के शिकार हम होते हैं स्वभावतया हमारी भूख मर जायेगी।जब भूख मर जायेगी तो खाना नहीं खायेंगे,खाना नहीं खायेंगे तो खाली पेट में गैस बनेगा ही,जब गैस बनेगा तो पेट फुलना स्वभाविक है,जब पेट फुलेगा तो उसे खाली भी करना ही पड़ेगा।पर यह अपने बस की बात नहीं।नतीजा जब भी जहाँ कहीं भी किसी भी माहौल में बैठेंगे तो पूरा माहौल दुर्गंधमय होगा ही।परिणाम भी मिलना ही है मिलता भी है।उस दुर्गंध से बचने को नाक दबाये धीरे धीरे वहाँ बैठे लोग बाहर होंगे और हम वहाँ अकेले बैठे अपनी कब्जियत पर चिंतन करेंगे जिसके कारण लोग हमसे दूरी बनाने लगे हैं।अरे भाई आप कहीँ देश में चल रहे वर्तमान माहौल पर तो चिंता नहीं करने लगे।कुछ नेताओं को तो कब्जियत ने नहीं घेर रखा है।वैसे लाजिमी है घेरना भी।वो इसलिये क्योंकि अबतक तो बेचारे सिर्फ खाते ही आये थे।लगातार खाने के चक्कर में फारिग होना मुनासिब समझा नहीं।वो इसलिये भी कि कहीं फारिग होने के चक्कर थाली कहीं कोई और न चट कर जाये।अब तो आप समझ ही गये होंगे कब्जियत का कारण।तो जब कब्जियत हो ही गई फिर तो पेट फूलना भी स्वाभाविक है और जब पेट में ऐंठन जोरों की होने लगी तो कहीं किनारे ही सही पेट को पचकाना तो पड़ेगा ही।जब पेट पचकेगा तो जाहिर है वातावरण में दुर्गंध भी फैलेगा।अब उन्हें कौन समझाये कि देश में एक ऐसा भी वैद्य है जो हर दिन एक पुड़िया फंकी देकर कब्जियत से आजीवन छुटकारा दिलाने में समर्थ है।इसका उदाहरण भी उसने पेश कर दिया है।पड़ोस वाले उस वैद्य की कारस्तानी देख हैरान हैं।पर हम हैं कि मानने को तैयार नहीं।कभी उल्टी करके तो कभी............करके लगातार माहौल को दुर्गंधयुक्त किये जा रहे हैं।अरे भाई जरा ये भी तो सोंचिये कि जब दुर्गंध हवा में तैरती है तो उसका प्रभाव हमारे घर परिवार पर भी पड़ता है।ऐसे में गुस्से के मारे कहीं अपने घर के लोग भी साथ न छोड़ दें।बेटा बहु चला गया तो कोई बात नहीं कहीं साथ में पत्नी भी चली गई तब क्या होगा?आप लोग भी समझदार हैं अब आगे सोचना आपका भी काम है।हम तो यहीं रुकते हैं काहे कि शाम का समय है टाइम हो गया फारिग होने का।
💐💐💐💐💐💐💐@पद्मनाभ*********

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