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तू आदमी।

गर जीतना है महाभारत तो
अर्जुन बनना ही होगा
बनके दुर्योधन बिखर जायेगा
अंग अंग सर्वांग।

बबूल सजा होता है काँटों से
इसीलिये काटा जाता है बार बार
लगे होतें हैं सुन्दर सुगन्धित रसदार
पीले फल आम के इसीलिये
सींचे जाते हैं सौ बार।

निर्णय करने का अब तुझे है अधिकार आदमी
दो में से क्या चाहिये आखिर
मुहब्बत का कारोबार या
कि नफरत की लंबी दीवार
बुद्धि है विवेक है समझ की शक्ति से ओत प्रोत
नौका की थामना मजधार में
अपना पतवार।

लहरें उठेंगी गिरेंगी आयेगा दौर
तूफानो का भयंकर प्रलयंकर
पर खड़ा होगा तू हाँथों में थामे
पतवार अभयंकर  जब
थम जायेगा दौर तूफान का
पार होगी नाव देखेगा 
सबसे पहले सुनहले किरण को प्राची में
तू आदमी।।
               💐💐💐@पद्मनाभ💐💐💐

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रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण  नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम  होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"

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