काम करो कुछ काम करो
जग में रहकर कुछ नाम करो
यूं हीं न किसी को बदनाम करो
अपने कृत्यों पर ध्यान धरो
न उनकी तुम परवाह करो
रवि शशि पवन वरुण
रहते हैं सब सदा मगन
प्रात सान्ध्य है आना जाना
मध्याह्न कहाँ देता ताना
विचार करो व्यवहार धरो
मत बून निरर्थक ताना बाना।
जग में अमरत्व तुझे मिल जाएगा
स्वर्ग धरा पर तू तब लायेगा।
बस ध्यान धरो सुज्ञान वरो
कर त्याग मिथ्याभिमान तू
आराध्यदेव को नमन करो।।
💐💐मनोज💐💐
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रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"
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