ए बाबु
ई तो बहुते बढ़िया सरकार हे
जेकर राज में रोज होईत बलात्कार हे
लाचार बेबस पति आउ बाप
बेचारा बनल पेड़ से बंधल
अप्पन आँखे देखैत सब अत्याचार हे
सब देखैत सुनैत हथ सब कोई
तैयो बड़ी जोश में कह हथ
इहाँ तो सुशासन बरकरार हे
जब भी घट हे ऐसन कोई घटना
शुरु हो जा हे करेजा सबके फटना
पहिले कोई कुछ न सोच हथ
आखिर एकरा से बचे लेल
हमनी के का करतब हे करना
जे कैलक बलात्कार
ओकरा मार जूता चार
कोई कोई इहो कह हथ
एतना मार कि मर जाये सार
बकि सोंच ऊ के हे
हम ही तु ह आउ हमनिये के
ई रेंगन हे चेंगन हे
शरम से मूड़ी झुक जा हे
समाचार जब कान में सुना हे
सब कोई बतियैला पर एही कह हे
हमनी ही अथवा लचार
ए बाबु लग हौ सच्चे में
बिहार हौ बिमार
काहे कि इहाँ लगतरिये होइत हौ
बलात्कार।।
💐💐मनोज💐💐
रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"
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