मधुशाला।
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अमृत पीकर क्या होगा
चिर शांत जायेगा बैठ
कहीं पीनेवाला
जो मिल जाय रस हाला
बस पीता जाय मतवाला
एक रोज पिये हर रोज पिये
पल पल क्षण क्षण पीता जाये
चाह नहीं पर मिटे कभी
टूटे चाहे कितना प्याला
ऊपरवाले ने भेजा है
हर हाथ लिये मधुघट प्याला
मरघट जाने से पहले ले
बैठ तनिक तू मधुशाला
स्वागत करने को खड़ी मिलेगी
मधुघट हाथ लिये तब मधुबाला।।
..........मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"।
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