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दानंदुर्गतिनाशनम्।

दानं दुर्गति नाशनम्।
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शास्त्र बताते हैं दान से दुर्गति का नाश होता है।शायद इसलिए आज दान करना कुछ ज्यादा ही महत्वपूर्ण लग रहा है।जिधर भी नजर जाती है दान के ही चर्चे सुनने और देखने में आ रहे हैं।टीवी,अखवार ,सादृश्यचलभाष हो या टोला टाटी,आस पड़ोस ,स्त्री पुरुष सब के सब आजकल दान की ही चर्चा म़े मशगूल दिखते हैं।ऐसा लग रहा है मानो सब एक साथ ही इसी कोरोनाकाल में दुर्गतिमुक्त हो जाना चाह रहे हैं।संभव है कोरोना से मरने का भय भी सता रहा हो।शायद इस कारण भी लोग इसी जनम में दुर्गतिमुक्त हो जाना चाह रहे हों ताकि अगला जनम शायद सुधर जाय।फिर कोरोना या इस जैसी अन्य कोई विपदा नहीं सतावे।खैर जो भी हो दान की महत्ता जब शास्त्र सम्मत है तो अवश्य करना चाहिये।लेकिन हमने दान किया या नहीं इसका प्रमाण मेरे नहीं रहने पर या भगवान चित्रगुप्त के किसी दूत के द्वारा जाँच किये जाने पर प्रमाण स्वरूप उपस्थित किया जा सके यह भी आवश्यक है।आज सब जगह प्रमाण माँगा जा रहा है तो संभव है देवलोक में भी दुर्गतिनाश के लिये प्रमाण माँगा जाये !
ऐसे में यह भी आवश्यक ही है कि जाँच पदाधिकारी स्वरूप देव के समक्ष प्रमाण प्रस्तुत करना पड़े।तब दान कर्ता और दान ग्रहेता दोनो का फोटो काम आवेगा।काहे कि आजकल धर्ती के भगवान भी जमीन खरीद बिक्री के समय दोनो का फोटो अनिवार्य कर दिये हैं।आधार कार्ड त़ सब जगह जरूरी हैये है।इसलिये दान में समान कम हो चाहे जादा ई ओतना जरूरी नहीँ है लेकिन दान के समान के पैकेट के साथ लेने वाला का समान ले ले फोटो होना जरूरी है।ई होगा पोख्ता प्रमाण।अब दान चाहे नेता करे चाहे जनता ई लोकतंत्र में नियम सबके लिये बराबर है।अब फोटो खींच के खाली अपने पास अगर रख लेते हैं तो ई भी बड़ा गड़बड़ हो सकता है कल।काहे कि हम तो रहेंगे नहीं ,कहीं ऊ फोटौआ एने ओने हेरा गया त सब गुड़ गोबर हो जायेगा।हम दुर्गतिमुक्ति के कामना ले ले रह जायेंगे।इसलिये इसका उपाय यही है इसको अखवार में भी छपवा दें साथे साथ जादा से जादा सोसल मीडिया में भी डाल दें।इससे ई फायदा होगा कि हमरा भिरी वाला अगर नहियों मिलेगा त सवा सौ करोड़ भारत के आबादी वाला देश में जहाँ छोटका से बड़का तक सब सादृश्यचलभाष रखता है सबके पास रहेगा।चित्रगुप्त जी के दूत जैसहीं माँगेगे दनादन उनको असंख्य प्रमाण मिल जायेगा वही क्षण हम दुर्गतिमुक्त होके सीधे स्वर्ग के टिकट कटवा लेंगे।एकोदिन नरक के मुँह नहीं देखेंगे।बिल्कुल यही बात सोंच के फोटो को एतना साझा किया जा रहा है।अब ई सोंच अगर है तो एकदम बुरा नहीं है।भाई लोकतंत्र में सबको अपना मनमर्जी चलने का हक है।जब नेताजी चलेंगे त जनता क्यों नहीं चलेगी।आखिर राज तो जनते का न है।इसलिये इसमें किसी को बुरा लगने वाली बात ही नहीं होनी चाहिये।फिर कुछ लोग हैं कि इसका विरोध कर रहे हैं।इससे यही होगा कि "दानं दुर्गति नाशनम् के जगह दानं दुर्गतिकरणम् "हो जायेगा।
.........मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"।

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