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भैयादूज।

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भैया दूज।
************
कल फिर से आ रहा है
भाई बहन के स्नेह का 
अमिट त्यौहार भैयादूज
जरा इसे बूझ
हाँथ में बाँधकर कंगन
माथे पर लगाकर टीका
देती है बहना आशीष
लम्बी उम्र की
बदले में
फिर वही वचन 
लेती है रक्षा का
सिर्फ अपनी
नहीं
हर उस देवी का
जो किसी की बहन है
बहन के हाँथ की मिठाई
खाते हुये हम मन ही मन
हो जाते हैं संकल्पित
और जेब से निकाल कर
सौ दो सौ पाँच सौ का एक नोट
रख देते हैं उस थाली में
जहाँ अब तक मिठाई सज रही थी
साथ ही रख देते हैं
अपना वह संकल्प भी जो
अभी अभी लिया था
मन ही मन
फिर?
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐भैयादूज की हार्दिक शुभकामना💐💐💐
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
@**************पद्मनाभ।

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रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण  नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम  होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"

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