तू कब ठहरेगा।
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बाकी से आगे*****
खबर पहुँच गेलो थाना में।दरोगाजी सातो के पकड़ के हाजत में बंद कैलन आउ सोंट साँट के जेल भेज देलन।सबकोई खुश।जिला जेबार में थानेदार साहेब के बड़ाई होवे लगल।इहाँ तक तो नीके सुखे बढ़िये होल ऊ अँगुलिमाल के औलादन लेल।बकि अब सुरु होलो तीन तेरह।कुछ कहित हथ कि सब बदमासी ओकरे हलै।काहे ला गेलै हल ऊ जंगलवा में ऊ छौंड़ा के साथे?बप्पा मैया भेजलकै हल कोचिंग पढ़े ला कि जंगल में मंगल करेला?कुछ एहु कहैत हथ कि बताब तो गजबे जमाना हो गेल।अब कैसे कोई कहीं जाये।केकरा पर विसवास करे।गौंयें के न सब सातो लैकमन हलै।चिनह न हलै ओकरा।भला ऐसन कैल जाहे।का जनि ऊ जिअ है कि का होब है ओकरा।कुछ लोग के एहू कहित सुनली कि सरकारो के गलती न है,जान हे कि जंगल पहाड़ के सुनदरता आदमी के खिचबे कर हे।अमदी मव बहलावे आखिर कहाँ जा हे।सहर में न पारक हे ,न कोई खुलल मैदान हे,न कोई बगैचा हे जहाँ तनि अराम से बैठ सके,कुछ बोल बतिया सके केकरो से।त ले दे के एही सब जगह न हे जहाँ तनि मनबहलाव होव हे अमदी के।सरकार न चही कि ई सब जगह पर धेयान देओ।सुरछा के बेबसथा करो।ऊ का जान हलै कि ऐसन होयत।अरे दुनु अभी कम उमर के हलै।नौआँ दसमा में त पढ़वे कल हलै।पहड़िया के निचहीं दनु बैठ के बतियाइत हलै बेचारी ,का जान हलै कि ऐसन हो जायत।कुछ लोग के एहु कहित सुनली कि दरोगा जी तो जेल भेज देलथी।इनकर काम तो खतम हो गेल।बकि कोटवा का जनी का सजा दे है?हमरा तो बुझा हो कि ई सबके फाँसी हो जाये के चही।बकि होये देथी सब तबे न।अब एकरा में बड़का बड़का अमदी के पैरवी भी तो लगतै।चुनाव आवे वाला है।अरे ऊ न सातो गरीब घर के मजूर नियन गाय गोरु चलावे वला लैकन नियन लग है।बकि भोटवा तो ओहनियों के हैये न है।अब देख जज साहेब ई में का फैसला कर हथ।सजाय होब है कि यो बरिये हो जा हे सातो।काहे कि गबहियो तो चहिअई।के देतै गवाही ऐसन में।ओकरो डर है न भाई।ओकरो तो बालबच्चा है।बिहान कहीं ओहू घूले गेलै आउ ओकरो साथे.....।बाप रे गजब समय हो गेल।कुछ समझ में आवे ।का करे अदमी का न करे।लैकन के पढ़ावल लिखावल भी जरुरिये हे।न पढ़ाब त ओकरो में चैन न ।आजकल बिना पढ़ले काम धंधा तो कम बेसी मिलियो जा हे बकि बिआह होना बड़ी मोशकिल हे।सबकोई पढ़ले लिखल खोज हे।अब मायो बाप एकरा में का करतै।लैकन के समझैबे न करतै।दिमाग सुन्न होल हो।कैसन जमाना आ गेल।
@******पद्मनाभ
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