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मिठाईयाँ बँटी।

मेरे जन्म पर मिठाईयाँ बँटी मैंने नहीं खाईं मेरे मरने के बाद शुद्ध दूध में खीर बनेगी  फिर भी नहीं खाऊँगा आचार्यों ने मंत्रध्वनि की मुझे कुछ समझ नहीं आया आचार्य वेदध्वनि करेंगे मैं नहीं सुन पाऊँगा आप नाराज मत होना क्योंकि तब भी आप ही खाये थे अब भी तो आप ही खाओगे तब तो आपने ही सुना था अब भी तो सुनोगे आप ही न फिर भी मेरे ही साथ वैमस्य आखिर क्यों मेरे आने से भी लाभ आपका जाने पर भी लाभ आपको अब तो मुस्कुरा दो गले मिलकर शत्रुता भुला दो।। .....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"।

निद्रा समाधिस्थितिः।

निद्रा समाधिस्थितिः। ********************* निद्रा !अर्थात् नींद,शयन की अवस्था। साधारणतया निद्रा शब्द से यही सामान्य अर्थ निकलता है।किन्तु जब गूढार्थ की ओर दृष्टिपात करते हैं तो बात कुछ और ही निकलकर आती है।निद्रा का तात्पर्य मात्र शयन अथवा पूर्ण विश्राम नहीं अपितु निद्रा तो पूर्ण समाधि की वह अवस्था है जहाँ आत्मा और परमात्मा का मिलन होता है। "आत्मा त्वं गिरिजा मतिः"।विभिन्न आचार्यों के मतानुसार निद्रा ही भक्ति है।इस अवस्था में शरीर रूपी गेह में प्राण सहचर की भूमिका में होता है।"सहचराः प्राणाः शरीरं गृहं"।पूजा तो विषयोपभोग की रचना मात्र है।"पूजा ते विषयोपभोग रचना"।इसलिये निद्रा रूप समाधि की प्राप्ति हेतु यह आवश्यक है कि जिस क्षण निद्रा के आने की संभावना हो तत्क्षण भगवन्नाम का जप आरंभ कर निद्रा के आने तक निरंतर यदि मनसा नाम जप चलते रहे तो जाग्रतावस्था की समाप्ति और सुखद निद्राप्राप्ति शीघ्र ही संभव है।ज्यों ज्यों हम भगवन्नाम का स्मरण करते हैं शनैःशनैःहमारा संबंध संसार से छूटता जाता है।यही वह अवस्था होती है जब हम जाग्रतावस्था को पूर्णतया समाप्त कर पाते हैं।यह ज...

पूजा ते विषयोपभोग रचना।

पूजा ते विषयोपभोग रचना। ************************ विषय!अर्थात् कामना,इच्छा।प्रत्येक पूजा के पूर्व हम संकल्प लेते हैं।हर संकल्प कामनापरक ही होता है।अमुक कामना सिध्यर्थम् ,अमुक देव /देव्याःप्रसन्नार्थम् इयम् संकल्पमहं करिष्ये/कारयिष्ये वा।संकल्प कभी भी निष्काम नहीं होता।संकल्प का विकल्प भी नहीं होता।फिर यह कहना कि हमारी पूजा निष्काम है,सर्वथा अनुचित प्रतीत होता है।क्योंकि उपरोक्त श्लोक वाक्य संदर्भ भी यही इंगित करता है।पूजा का विधान ही कामना सहित होता है न कि कामना रहित।जबकि जगत्गुरु त्रैलोक्याधिपति भगवान श्री राधावल्लभ कृष्ण ने अपनी अमर वाणी श्रीमद्भगवद्गीता में सदैव निष्काम कर्म की बात की है।अब आईये विचार करें यह संभव होगा कैसे?यह निष्कामता हमारे भीतर समाहित होगी कैसे,कौन सा विधान हमें अपनाना होगा जो मेरी पूजा को निष्काम रूप में परिवर्तित करे ।इस संदर्भ में संकेत करते हुये आचार्यगण कहते हैं कि कुछ भी करो उसे "त्वदीयं वस्तु गोविंदम् तुभ्यम्मेव समर्पयेत् "भाव लेकर करो।ह्रदय स्वच्छ हो ,किसी प्रकार की फलप्राप्ति की चिंता से हम अलग होकर "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन...

भूख।

भूख की आग जलाकर कर देती है राख सियासत दाँ हों या खासोआम कर देती है सबका चक्का जाम इस एक सवाल पर सब साधें मौन ओहदेदारों को समझाये कौन आते ही त्योहारों के मौसम फहराने लगते हैं महामारी के परचम चुनाव की वेला में दलों के रैला में महामारी पड़ जाती सुस्त आम अवाम से सियासतदान तक हो जाते भले चंगे दुरुस्त।। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"।

मंदिर।

#हमें_मंदिर_क्यों_जाना_चाहिए इस लेख का प्रारम्भ सोशल मीडिया पर चल रहे एक हिन्दू धर्म विरोधी पोस्ट से कर रहा हूँ जिसका उल्लेख व्हाट्सएप और फ़ेसबुक पर इस प्रकार है- भगवान की पूजा मत करो और कहते है मंदिरों में दान मत दो, मंदिर मत जाओ। कोरोना के बाद हम यदि ना भी रहे तो आने वाली पीढ़ी से कह देना, दान देना हो तो अस्पताल बनाने के लिए ही देना। धार्मिक स्थल के भी संकट के समय में दरवाजे बंद हो जाते हैं । इस प्रकार के अनर्गल पोस्ट शोसल मीडिया पर इस कठिन परिस्थिति में भी प्रसारित किए जा रहे हैं इसीलिए या तो ये लोग मंदिर का महत्व से अवगत नहीं है या फिर एक षड्यंत्र के तहत मंदिर और हिन्दू धर्म का विरोध किया जा रहा है तो आईये मंदिरों का देश मे क्या वैज्ञानिक महत्व है इसका विश्लेषण इस लेख में किया जायेगा। कोरोना – वैश्विक महामारी, इसका समाधान क्या है ? क्या मंदिर में नहीं जाने पर कोरोना समाप्त हो जायेगा ? कोरोना एक वैश्विक महामारी है और कोरोना का संकट विश्वव्यापी हो रहा है। दिन प्रतिदिन लाखों की संख्या में लोग अपने जीवन से हाथ धो रहे हैं और अन्य लाखों लोग संक्रमित हो रहे हैं। लेकिन अभी तक इस विषाणु का क...

श्री गणेश सहस्त्र नामावली।

*श्रीगणेश गकारसहस्रनामावली* ॥ ॐ श्री महागणपतये नमः ॥ ॐ गणेश्वराय नमः । ॐ गणाध्यक्षाय नमः । ॐ गणाराध्याय नमः । ॐ गणप्रियाय नमः । ॐ गणनाथाय नमः । ५। ॐ गणस्वामिने नमः । ॐ गणेशाय नमः । ॐ गणनायकाय नमः । ॐ गणमूर्तये नमः । ॐ गणपतये नमः । १०। ॐ गणत्रात्रे नमः । ॐ गणंजयाय नमः । ॐ गणपाय नमः । ॐ गणक्रीडाय नमः । ॐ गणदेवाय नमः । १५। ॐ गणाधिपाय नमः । ॐ गणज्येष्ठाय नमः । ॐ गणश्रेष्ठाय नमः । ॐ गणप्रेष्ठाय नमः । ॐ गणाधिराजाय नमः । २०। ॐ गणराजे नमः । ॐ गणगोप्त्रे नमः । ॐ गणाङ्गाय नमः । ॐ गणदैवताय नमः । ॐ गणबंधवे नमः । २५। ॐ गणसुहृदे नमः । ॐ गणाधीशाय नमः । ॐ गणप्रदाय नमः । ॐ गणप्रियसखाय नमः । ॐ गणप्रियसुहृदे नमः । ३०। ॐ गणप्रियरतोनित्याय नमः । ॐ गणप्रीतिविवर्धनाय नमः । ॐ गणमण्डलमध्यस्थाय नमः । ॐ गणकेलिपरायणाय नमः । ॐ गणाग्रण्ये नमः । ३५। ॐ गणेशाय नमः । ॐ गणगीताय नमः । ॐ गणोच्छ्रयाय नमः । ॐ गण्याय नमः । ॐ गणहिताय नमः । ४०। ॐ गर्जद्गणसेनाय नमः । ॐ गणोद्यताय नमः । ॐ गणप्रीतिप्रमतनाय नमः । ॐ गणप्रीत्यपहारकाय नमः । ॐ गणनार्हाय नमः । ४५। ॐ गणप्रौढाय नमः । ॐ गणभर्त्रे नमः । ॐ गणप्रभवे नमः । ॐ गणसेनाय नमः । ॐ गण...

त्रिपुण्ड धारण।

*त्रिपुंड और तिलक किसे कहते है तथा किस दिन किस का तिलक लगये और इस में कौन कौन देवता निवास करते है !!* 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ ज्योतिष के अनुसार यदि तिलक धारण किया जाता है तो सभी पाप नष्ट हो जाते है सनातन धर्म में शैव, शाक्त, वैष्णव और अन्य मतों के अलग-अलग तिलक होते हैं।  ललाट अर्थात माथे पर भस्म या चंदन से तीन रेखाएं बनाई जाती हैं उसे त्रिपुंड कहते हैं। भस्म या चंदन को हाथों की बीच की तीन अंगुलियों से लेकर सावधानीपूर्वक माथे पर तीन तिरछी रेखाओं जैसा आकार दिया जाता है।  शैव संप्रदाय के लोग इसे धारण करते हैं। शिवमहापुराण के अनुसार त्रिपुंड की तीन रेखाओं में से हर एक में नौ-नौ देवता निवास करते हैं। त्रिपुंड के देवताओ के नाम इस प्रकार हैं- 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ 1- अकार, गार्हपत्य अग्नि, पृथ्वी, धर्म, रजोगुण, ऋग्वेद, क्रियाशक्ति, प्रात:स्वन तथा महादेव- ये त्रिपुंड की पहली रेखा के नौ देवता हैं। 2- ऊंकार, दक्षिणाग्नि, आकाश, सत्वगुण, यजुर्वेद, मध्यंदिनसवन, इच्छाशक्ति, अंतरात्मा और महेश्वर- ये त्रिपुंड की दूसरी रेखा के नौ देवता हैं। 3- मकार, आहवनीय अग्नि, परमात्मा, तमोगुण...