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सम्मासम्बुद्धस्स

सम्मा सम्बुद्धस्स ......................                       आज बुद्ध पूर्णिमा है।बौद्ध धर्मावलंबी भक्तगगण इसे परम पावन दिवस के रूप में मानते हैं।वस्तुतः है भी यह परमपावन दिवस।आज के दिन ही महात्मा बुद्ध का जन्म बुद्धत्व की प्राप्ति और महापरिनिर्वाण अर्थात महासमाधि।है तो यह बड़े आश्चर्य की बात किन्तु उपरोक्त शीर्षक को सार्थक भी करता है।सम्मा सम्बुद्धस्स अर्थात जब हम सम की अवस्था को प्राप्त कर लेते हैँ तभी बुद्ध की संज्ञा पाते हैं।जिसने जन्म और मरण के मध्य समता को पा लिया वही तो बुद्ध है।महात्मा बुद्ध ने वैसे तो अपने प्राप्त ज्ञान के कई अनुभवों को सूक्तों के माध्यम से उद्धृत किया है किन्तु मुझे उनके ये समानता के भाव सबसे प्रिय और अनुकरणीय लगे।क्योंकि जैसे ही हम अपने आपको समभाव में पाते हैं हम निर्विकार हो जाते हैं।हमारी सारी मलिनता समाप्त हो जाती है।आपस के सारे रागद्वेष खतम हो जाते हैं।ऊंच नीच अमीर गरीब गोरे काले जाति सम्प्रदाय के भेद मिट जाते हैं।हम पूर्णतया सम्गच्छद्ध्वं संवदध्वं सम्वोमनांसि जानताम् के भाव में आ जाते हैं।यही तो बुद्धत्व है।वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जहाँ परिवार और स...

बचपन

जब भी तुझे देखता हूं तुझमें अपना अक्स ढूंढता हूँ कभी हंसना कभी रोना कभी रूठना कभी मचलना कभी कभी हठ कर बैठना बाबूजी की डांट मां की ममता दादाजी जी की प्यार भरी घुट्टी सारी शैतानियों की पलभर में कर देती छुट्टी फिर क्या वही मस्ती का आलम  ना दोस्ती ना दुश्मनी कौन अपना कौन पराया जिसने हाथ बढ़ाया उसने मेरे प्यार का बोसा पाया कहाँ गये वो दिन कोई तो बता दे वो पलछिन काश एक बार फिर से देख पाता निश्छल निर्विकार निश्चेष्ट उन सुनहरे पलों को जी पाता निश्चिंत भाव से।                                         💐💐मनोज💐💐

काम करो कुछ काम करो

काम करो कुछ काम करो जग में रहकर कुछ नाम करो यूं हीं न किसी को बदनाम करो अपने कृत्यों पर ध्यान धरो न उनकी तुम परवाह करो रवि शशि पवन वरुण रहते हैं सब सदा मगन प्रात सान्ध्य है आना जाना मध्याह्न कहाँ देता ताना विचार करो व्यवहार धरो मत बून निरर्थक ताना बाना। जग में अमरत्व तुझे मिल जाएगा स्वर्ग धरा पर तू तब लायेगा। बस ध्यान धरो सुज्ञान वरो कर त्याग मिथ्याभिमान तू आराध्यदेव को नमन करो।।                                      💐💐मनोज💐💐                                                  🎂

राजनीति का व्यापार

अत्याचार अनाचार व्यभिचार दंभाचार यही तो हैं मेरे आज के सदाचार। बगैर इनके मै हूँ हारा हुआ जुआरी क्योंकि मुझे करना है राजनीति का व्यापार।                                      💐💐मनोज💐💐

ये मन्दिर भी तेरा

येमंदिर. भी तेरा मस्जिद भी तेरी ये गिरजा भी तेरा गुरुद्वारा भी तेरा है। भगवान तुही है खूदा तूही है प्रभु या फिर वाहेगुरु  कहलाते हो।  जीव जगत के स्वामि तुम्हीं अंश तेरे कहलाते हम। तेरे व्याज से इस दुनिया के नातेदार हुए आपस मे । रिश्ते नाते सभी यहाँ तेरे दम पर चलते हैं फर्क कहाँ आपस मे फिर भी कहर बरपते हैँ। धनी फकीर काले गोरे सब तेरी संतान हैँ। द्वंद्व कहाँ पैदा करता है आका तू तो सचमूच छलिया महान है। राग रंग औ जात पात को कबतक दूध पिलाओगे। एक दिवस वह आएगा अपनी करनी पर पछताओगे।                                      💐💐मनोज💐💐                                                  🎂

कुत्ते हजार भौंकें

कुत्ते हजार भौकें बार बार मस्त हाथी की मस्त चाल उसकी भूक की हूक पर कब होती है तार तार।।                                       💐💐मनोज💐💐

लगी है आग

लगी है आग घर में फिर बुझाना चाहता हूं मैं पड़ोसी सेंकते हैं हाथ मेरा ही भाई जो है साथ करूँ मैं लाख कोशिश आज समझ में कुछ नहीं आता मेरे ही सामने सबकुछ मेरा जलता नजर आता बनाने में जिसे हमने बरस चालीस लगाये थे उजड़ता देख उसको अब मेरे आंसू नहीं थमते अपने स्वार्थ की खातिर जला डाला  इसे उसने तमाशा देखते सब हैं धधकते आशियाने की                                 💐💐मनोज💐💐