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सम्मासम्बुद्धस्स

सम्मा सम्बुद्धस्स
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                      आज बुद्ध पूर्णिमा है।बौद्ध धर्मावलंबी भक्तगगण इसे परम पावन दिवस के रूप में मानते हैं।वस्तुतः है भी यह परमपावन दिवस।आज के दिन ही महात्मा बुद्ध का जन्म बुद्धत्व की प्राप्ति और महापरिनिर्वाण अर्थात महासमाधि।है तो यह बड़े आश्चर्य की बात किन्तु उपरोक्त शीर्षक को सार्थक भी करता है।सम्मा सम्बुद्धस्स अर्थात जब हम सम की अवस्था को प्राप्त कर लेते हैँ तभी बुद्ध की संज्ञा पाते हैं।जिसने जन्म और मरण के मध्य समता को पा लिया वही तो बुद्ध है।महात्मा बुद्ध ने वैसे तो अपने प्राप्त ज्ञान के कई अनुभवों को सूक्तों के माध्यम से उद्धृत किया है किन्तु मुझे उनके ये समानता के भाव सबसे प्रिय और अनुकरणीय लगे।क्योंकि जैसे ही हम अपने आपको समभाव में पाते हैं हम निर्विकार हो जाते हैं।हमारी सारी मलिनता समाप्त हो जाती है।आपस के सारे रागद्वेष खतम हो जाते हैं।ऊंच नीच अमीर गरीब गोरे काले जाति सम्प्रदाय के भेद मिट जाते हैं।हम पूर्णतया सम्गच्छद्ध्वं संवदध्वं सम्वोमनांसि जानताम् के भाव में आ जाते हैं।यही तो बुद्धत्व है।वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जहाँ परिवार और समाज विखरन की दहलीज पर खड़ा दिखलाई पड़ता है वहाँ इसकी महती आवश्यकता महसूस हो रही है।तमाम वाह्याडंबरों को छोड़कर यदि हम अपनेआपको सम भाव में ला पायें तो बुद्ध पूर्णिमा मनाना सार्थक हो जाएगा।तो आइए हम समवेत स्वर में
उच्चरित हों
               बुद्धं शरणम् गच्छामि
               धम्मं शरणम् गच्छामि
               संघं शरणम् गच्छामि।
                              नमो बुद्धाय
                         💐💐मनोज💐💐

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