आओ न मिलो न भीड़ की शक्ल में
गाँव से गिराँव से शहर से अपने अपने ठाँव से
मिलकर बैठेंगे गोलगप्पे छोले कचौरी पूरी पोलाव
साथ में गरम गरम जलेबी की दावत भी उड़ायेंगे
लोगों को भरमायेंगे अपनी महफिल सजायेंगे
तुम में से ही कोई रूस कोई चाइना कोई फ्रांस
बनकर सब मिल अंतर्राष्ट्रीय शकल बनायेंगे
सोशल मीडिया का जमाना है रंग बिरंगा पोस्टर
लहरायेंगे सबको बतायेंगे अब तो हम राष्ट्र से
बहुत ऊपर उठ चुके हैं अंतर्राष्ट्र तक पहूँच चुके हैं
भले मेरा पड़ोसी भी मुझसे महरूम है।।
💐💐💐💐@पद्मनाभ💐💐💐💐
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