Skip to main content

Posts

पित्तृपक्ष।

आ गया है पितृपक्ष उपस्थित हो चुके हैं पावन गया धाम में हमारे पितर! विष्णु चरण के समक्ष करने को अभ्यर्थना तिल यव चावल ले कुशहस्त हम भी हों उपस्थित अपने आगत पितरों के समक्ष करने को तर्पण स्व श्रद्धा का समर्पण पाने को आशीष दें रख चरणों पर शीस होगी मनोकामना पूरी जो रह गई है अधूरी होगी दूर विपन्नता आयेगी घर सम्पन्नता महक उठेगी तेरी फुलवारी गूँजेगी घर में संतति की जब किलकारी।। 💐💐@मनोज।com.💐💐

WhatsApp Chat with अखिल भारतीय मग संसद 1

9/23/18, 9:42 PM - Messages to this group are now secured with end-to-end encryption. Tap for more info. 9/23/18, 11:30 PM - ‪+91 94507 93529‬: तर्पण विधि – (देवर्षिमनुष्यपितृतर्पणविधि) प्रातःकाल संध्योपासना करने के पश्चात् बायें और दायें हाथ की अनामिका अङ्गुलि में 'पवित्रे स्थो वैष्णव्यौ सवितुर्वः प्रसव उत्पुनाम्यच्छिद्रेण पवित्रेण सूर्यस्य रश्मिभिः' इस मन्त्र को पढते हुए पवित्री (पैंती) धारण करें । फिर हाथ में त्रिकुश, यव, अक्षत और जल लेकर निम्नाङ्कित रूप से संकल्प पढें— ॐ विष्णवे नम: ३। हरि: ॐ तत्सदद्यैतस्य श्रीब्रह्मणो द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे आर्यावर्तैकदेशे अमुक(जो संवत् हो)संवत्सरे अमुक(जो मास हो)मासे अमुक(जो पक्ष हो) पक्षे अमुक(जो तिथी हो) तिथौ अमुक(दिन हो) वासरे अमुक(जो गोत्र हो)गोत्रोत्पन्न: अमुक (जो नाम हो)शर्मा (वर्मा, गुप्त:) अहं श्रीपरमेश्वरप्रीत्यर्थं देवर्पिमनुष्यपितृतर्पणं करिष्ये । तीर्थ निर्णय:- इसमें मनुष्य के दाएं यानी सीधे हाथ में 5 ऐसी जगहों के बारे में बताया गया...

मोक्ष प्रदाता।

लगभग हफ्ते भर बाद पितृमुक्ति पर्व आरंभ होनेवाला है। हमारे पूर्वज देवरूप पितृगण गयाजी में अपने अपने परिजनों विशेषतः पुत्रों की आश में पधारने वाले हैं।ऐसे मे उन पितृभक्त परिजनों सुपुत्रों के स्वागतार्थ पावन विष्णु नगरी सज संवर रही है।अस्तु मैंने भी उन आगत अतिथियों को देवरूप मानकर उनके सम्मान मे इन चंद पंक्तियों को परोसने की हिमाकत की है ।                             तर्पण अर्पण                             ********** विष्णु चरण रज सिक्त फल्गु गंगाजल से सिंचित। पितृमोक्ष प्रदाता जग मे पावन सुन्दर है यह नाम।। स्वागत आगत का करने खड़ा अकेला विष्णुधाम। ज्ञान प्रदाता मुक्ति दाता अक्षयलोक मग मोक्षधाम।। सौर शाक्त शैव जैन बौद्ध रज चंदन मृदा यहाँ। कण कण मे बसती है देवों संतों की कृपा जहाँ।। अभिनंदन वंदन करने को नित नयन बिछाता है आने पर पितरों के प्रतिवर्ष भरे हृदय हर्षाता है।। तर्पण अर्पण कर पिण्ड समर्पण ही विधान बतलाता है। साथ न लाया कुछ भी क्योंकर सर्वस्व समर्पण पाता है।। दाता और विधाता के संग जीव जगत का नाता है। भाव भरे रससिक्त वचन ही पितृदेव को भाता है।। 🎂🎂🎂🎂...

मैं।

मैं !को मैं की तलाश       **************** मैं !मैं को ढूंढ रहा हूँ मां की पवित्र कोख से जन्म लिया पिता की गोद माता कीे आंचल मे पला बेटा कहलाया । बहन ने प्यार दिया दुलारा झगड़े किया भाई ने साथ खेला कुट्टि की फिर भी भाई ही कहलाता रहा। विद्यालय गया पढ़ाई की गुरु ने शिक्षा दी मित्रों ने सहयोग किया हंसी ठिठोली की शिष्य और मित्र बनकर रह गया। बालपन खत्म ,किशोर बने सुन्दर सुशील कन्या ने वरण किया नई पहचान बनी पति की कुछ दिनों बाद पत्नी ने अपने प्यार का प्रतिफल पुत्र को कन्या को जन्म दिया पिता बन गया मैं। परिजनो के भरण पोषण के लिए नौकरी ढूढना आरंभ किया नौकरी मिली नौकर बनकर रह गया। बच्चा बड़ा हुआ पढ़ाया लिखाया उसकी शादी भी कर दी उसके भी बच्चे दादा जी कहने लगे। शरीर थका कमजोर हुआ बिना बताये अचानक बीमारियों ने घेरा डाला काल के दूत लेकर चले गये अपने साथ पहले प्रेत फिर पितर मैं। मैं !मैं को ढूढता ही रहा ढूढता ही रहा।                            💐💐मनोज💐💐

कलम बंद कर जाता हूँ।

साहित्य नहीं मैं पढ़ता हूँ नित नये विचार पर गढ़ता हूँ। ऊंची चाहे जितनी भी हो नित नई इमारत चढ़ता हूँ। जो कुछ भी पाता घर बाहर लाता हूँ झोली भर भर कर। स्वादिष्ट लगे जो रसना को चट पट चट कर जाता हूँ। भूख भले मिटती ना हो पर मन तो तृप्ति पाता है। तन बन जाए दधीचि भले ही मानस को शान्ति दिलाता हूँ। कथनी करनी का भेद नहीं मैं समझ कभी भी पाता हूँ। जो जी मे आता जाता है बस कलमबंद कर जाता हूँ।                   💐💐मनोज💐💐

जय कन्हैया लाल की।

नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की खेलन को पाय गयो हाथी घोड़ा पालकी।। यशोदा के नंदन को संग भयो ग्वाल की केशर औ कुम कुम से तिलक कियो भाल की ।। मुख दधी लेप कियो फोड़ दियो मटकी मैया ने देख लियो भाग पड़्यो झटकी।। गैया चरावैं औ मुरली बजावैं मुरली की धुन पै गोपियन नचावैं।। डाली कदंब चढ़ि लीला दिखावैं अद्भुत अनंग छवि गोकुल के लाल की।। जय कन्हैया लाल की जय कन्हैया लाल की।। जय कन्हैया लाल की जय कन्हैया लाल की।।                        💐💐श्री कृष्ण जन्मोत्सव की                                         अशेष💐💐💐                         💐💐मंगलकामनाये                                              मनोज💐💐 🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🏁🏁🏁🏁🏁🏁🏁🏁🏁🏁🏁🏁🏁🔔☎📟🎤📯🎷🎸🎹📻📣📯📢🔕🏊🏇🎲🎮🎯🚵🏆🎿🏂🏄🎣♠🃏♣

बेसहारा।

********बेसहारा******** उम्र सारी बीत गई यारों न किसी के हम हुए न कोई हमारा हुआ। वक्त जब चलने का हुआ सारी हेकड़ी धरी की धरी रह गई बस मुझे ढोने को चार जन का सहारा हुआ।                 💐💐मनोज💐💐