9/23/18, 9:42 PM - Messages to this group are now secured with end-to-end encryption. Tap for more info. 9/23/18, 11:30 PM - +91 94507 93529: तर्पण विधि – (देवर्षिमनुष्यपितृतर्पणविधि) प्रातःकाल संध्योपासना करने के पश्चात् बायें और दायें हाथ की अनामिका अङ्गुलि में 'पवित्रे स्थो वैष्णव्यौ सवितुर्वः प्रसव उत्पुनाम्यच्छिद्रेण पवित्रेण सूर्यस्य रश्मिभिः' इस मन्त्र को पढते हुए पवित्री (पैंती) धारण करें । फिर हाथ में त्रिकुश, यव, अक्षत और जल लेकर निम्नाङ्कित रूप से संकल्प पढें— ॐ विष्णवे नम: ३। हरि: ॐ तत्सदद्यैतस्य श्रीब्रह्मणो द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे आर्यावर्तैकदेशे अमुक(जो संवत् हो)संवत्सरे अमुक(जो मास हो)मासे अमुक(जो पक्ष हो) पक्षे अमुक(जो तिथी हो) तिथौ अमुक(दिन हो) वासरे अमुक(जो गोत्र हो)गोत्रोत्पन्न: अमुक (जो नाम हो)शर्मा (वर्मा, गुप्त:) अहं श्रीपरमेश्वरप्रीत्यर्थं देवर्पिमनुष्यपितृतर्पणं करिष्ये । तीर्थ निर्णय:- इसमें मनुष्य के दाएं यानी सीधे हाथ में 5 ऐसी जगहों के बारे में बताया गया...