बलिमांसादिपूजेयं विप्र वर्ज्या मयेरिता। तेषां किल सुरामांसैर्नोक्ता नोक्ता पूजा नृप क्वचित्।। दुर्गा सप्तशती के अंतर्गत वैकृति रहस्य में ऋषि ने स्पष्ट रूप से ब्रा...
गर चाहिए तुमको सुकून तोड़ दो कलम भेज दो कलम के फनकार को कालापानी या फिर रंगून जब तक कलम होगी मेरे हाथ रूक नहीं सकता कभी दे नहीं सकता मैं किसी भी अंधभक्त का साथ सच को सच और झूठ को झूठ कहता रहूँगा तुम्हारी अच्छाई को सराहूँगा बुराई को डाहूँगा गर लगता है डर मेरी कलम की जुबान से मत कर फिर तू खिलवाड़ शेरे हिन्दुस्तान से। 💐💐मनोज💐💐
गर करना चाहते हो नेतृत्व भूलना होगा पहले अपना अस्तित्व तुम्हारी आड़ी तिरछी चाल से नहीं कटेगी व्याल बरछी ओर भाल से। ताल से ताल मिलाना होगा दो हाँथों से करताल बजाना होगा। एक हाँथ भला अकेला कर क्या सकता है दो बैल़ो की जोड़ी ही हल कर्षण करता है। भूलकर अहंकार करो समता का व्यापार वर्ना कहते जाओगे हम तो हैं सदा लाचार। 💐💐मनोज💐💐
मैं तलवार नहीं कलम की धार रखता हूँ। बम गोलियों से नहीं शब्दों से वार करता हूँ।। दाण्ड्याययन की धरती है ये जहाँ चाणक्य रहते हैं सिकंदर की क्या विसात जहाँ च़द्रगुप्त बसते हैं।। होगा तू सूरमा अपने शहर का। गामा सरीखे यहाँ हजार रहते हैं।। तेरी एक वार के बदले मैं दस दस वार करूँगा। फिर भी नफरत के बदले मैं तुझसे प्यार करूँगा।। बस एक बार तू सुन ले बात मेरी कान खोलकर। दुबारा न झांकना इस दर पे यहाँ इंसान बसते हैं।। गर पता हो गई तेरी नीयत खाम है। तुझे बेहतर पता है इसका क्या अंजाम है।। चाहता है अगर तू अमन चैन जहाँ में। तू नेक बन तू एक बन बन्दे यही पैगाम है।। 💐💐मनोज💐💐
दर्दे दिल की दास्तां बयां क्या करूं। बेमुरौअत है जमाना किसे क्या कहूँ।। झूठ का है बोलबाला झूठ ही व्यापार है। झूठी खबर झूठे बयां झूठ ही इतबार है।। झूठ के ही दम चल रहा सारा कारोबार है। सच बेचारा क्या करे मौन ही स्वीकार है।। ,💐💐मनोज💐💐