मैं तलवार नहीं कलम की धार रखता हूँ।
बम गोलियों से नहीं शब्दों से वार करता हूँ।।
दाण्ड्याययन की धरती है ये जहाँ चाणक्य रहते हैं
सिकंदर की क्या विसात जहाँ च़द्रगुप्त बसते हैं।।
होगा तू सूरमा अपने शहर का।
गामा सरीखे यहाँ हजार रहते हैं।।
तेरी एक वार के बदले मैं दस दस वार करूँगा।
फिर भी नफरत के बदले मैं तुझसे प्यार करूँगा।।
बस एक बार तू सुन ले बात मेरी कान खोलकर।
दुबारा न झांकना इस दर पे यहाँ इंसान बसते हैं।।
गर पता हो गई तेरी नीयत खाम है।
तुझे बेहतर पता है इसका क्या अंजाम है।।
चाहता है अगर तू अमन चैन जहाँ में।
तू नेक बन तू एक बन बन्दे यही पैगाम है।।
💐💐मनोज💐💐
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