*महाशय जी,*
हम सभी का मकसद साहित्य के क्षेत्र में शब्दाक्षर समूह और इसके सदस्यों की उन्नति-प्रगति में सहयोगी की भूमिका निभाना है। यह प्लेटफॉर्म भी इसी उद्देश्य की चर्चा के साथ आकार लिया था। मैंने अगर आज तक इस प्लेटफॉर्म पर कोई आपत्तिजनक सामग्री डाली हो, तो कृपया उसका सबूत पेश करें। अवश्य पेश करें। *आप उपाध्यक्ष हों या महाध्यक्ष, राज्याध्यक्ष, राष्ट्राध्यक्ष, विश्वाध्यक्ष अथवा ब्रह्माण्डाध्यक्ष,* आपको मुझे अनाप-शनाप कुछ भी कहने का कोई अधिकार नहीं, इतना तो आप अवश्य ही जान लें। आप यह न भूलें कि मैं सबको सम्मान देने की शिक्षा देते हुए हजारों लड़कियों-महिलाओं को एक छत के नीचे पढ़ाने-लिखाने वाले एक सम्मानित उच्च शिक्षण संस्थान की एक महिला प्रोफेसर हूं। और सभी लड़कियों-महिलाओं को उनके अधिकार तथा कर्तव्य के साथ ही अन्याय की स्थिति में *सभ्यता और वैधानिकता के दायरे में रहते हुए* प्रतिवाद और जरूरत पड़ जाने पर प्रतिकार के लिए प्रेरित करना भी मैं अपनी जिम्मेदारी मानती हूं। यह मुझे खुद भी ठीक से आता है और इसी वजह से अपनी बालिका और महिला छात्राओं को मैं आवश्यकता की स्थिति में प्रतिवाद/प्रतिकार लिए प्रेरित भी कर पाती हूं।
*एक बात और। मुझसे आप लिखित सबूत माँग सकते हैं, यह अधिकार आपको किसने दिया है महोदय ? आपके पास इस अधिकार का कोई लिखित सबूत हो, तो कृपया पेश करें।* हाँ, और आप ध्यान रखें कि मैं *शब्दाक्षर की पेड मेम्बरशिप के साथ इस संगठन की सदस्य हूं, हवा-हवाई नहीं।* इसके भी लिखित-पठित सबूत हैं मेरे पास। मेरे बैंकर के पास भी। आप कृपया मेरे महिला होने की स्थिति का लाभ उठाते हुए *मुझे कुम्हड़ बतिया समझने के फरेब* से बाहर निकल कर इत्मीनान से रहें, यही ठीक होगा।
एक और बात। आप मुझे रिमूव कर सकते हैं, यह बता कर आपने सबको अपनी औकात बता दी। उसके बाद मैं क्या कर सकती हूंँ, यह सुनना आपके लिए अभी भी बाकी है, क्योंकि मुझे अपनी औकात बताने की अभी कोई हड़बड़ी नहीं है। अगर आप मुझसे दो-दो हाथ करने का शौक पाल ही रखे होंगे, तो फिर ध्यान रखें कि मैं भी उसके लिए तैयार हूँ। आप चिंता न करें।
*आपके ध्यानार्थ :*
किसी संगठन में किसी का पद और उसकी जिम्मेदारी कुछ भी हो, उस संस्था के दूसरे सदस्य उसके लिए गाजर-मूली नहीं होते, इसे ठीक से मस्तिष्क में बैठा लें महानुभाव। *हम कोई आया राम गया राम टाइप के देश में नहीं रहते। इसका अपना एक संविधान है, नियम और कानून है।* कोई व्यक्ति देश के संविधान और इसके नियम-कानून से ऊपर नहीं हो सकता। आपके ज्ञानवर्धन के लिए मैंने ऊपर आपको बता दिया है कि मैं इस संस्था की पेड मेम्बरशिप होल्ड करने वाली सदस्य हूँ, कोई हवा-हवाई मामला नहीं है। कार्रवाई एकतरफा सिर्फ आप कर सकते हैं, ऐसा सोच-सोच कर आप अगर अकेले में प्रसन्न हो रहे हों, तो यह सिर्फ आपकी समस्या है और आप इस समस्या का भी आनंद ले रहे हों तो मुझे कोई दिक्कत नहीं, पर .............)
*धन्यवाद।*
*ईश्वर आपको महिलाओं के साथ अच्छा बर्ताव करने की समझ प्रदान करें, इसके लिए समस्त शुभकामनाएँ।*
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