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समस्या समाधान।

व्यापार या वेवसाय बांध दिया तो ये उलाये करे 

एक मुठी साबूत उरद की दाल 5 जोड़ी लॉन्ग काले कपड़े मै बांध कर दुकान के मालिक के ऊपर से 7 बार उतर कर नदी मै बहा दे नदी के किनारे 5 तरा की मिठाई 7 अगरबत्ती 5 रुपए का सिका रख दे जब बहाए तो बोले जाएं जहा से आए है वही लोट जाए ये उतारा दुकान के मालिक के ऊपर से उतारे 

बनते काम बिगड़ते है तो 

मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर जाओ वहा 5 बत्ती वाला दीपक लगाओ चमेली के तेल का और दिए मै 5 लॉन्ग डालो दिये के नीचे चावल रखो 5 तरा के फूल चढ़ा दो और जहा दिया लगाओ वही पर 21 गर्बत्ती लगाओ सिंदूर हनुमान जी को चढ़ाओ 5 बार हनुमान चालीसा का पाठ करो ये उपाय 5 मंगलवार करो
गुड़ चने का भोग लगाओ

अगर आप को कोई भी बदनाम कर रहा है तो 7 गुड़ की डली ले साबुत, रविवार को दोपहर 12 से 3 के बीच मे अपने सिर से सात बार उल्टा घूमा कर बहते साफ पानी मे डाल दे, ऐसा कम से कम 3 रविवार ज्यादा से ज्यादा 7 रविवार करना है.....

यदि धन का संचय नहीं है, परिवार की आर्थिक दशा को लेकर चिंता है तो शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी के मंदिर जाएं माता के चरण में एक जटा वाला नारियल,गुलाब या कमल के पुष्प अथवा माला,एक सवा-सवा मीटर गुलाबी और सफ़ेद वस्त्र, सवा पांव,चावल,दही,सफ़ेद मिष्ठान,एक जोड़ा जनेऊ एक साथ मां को भेट अर्पित कर माता की कपूर व देसी घी से आरती करें या करवाए तथा अपने मन की व्यथा माता के समक्ष कहें,शीघ्र ही आर्थिक पक्ष मजबूत होगा।

जय मां शमशान काली
जय महाकाली
जय भैरव बाबा जी
आदेश आदेश

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रावण का काम तमाम।

रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण  नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम  होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"

टोटके।

*🥦तांत्रोत्क वनस्पति टोटके🥦* 🕉️🏹🚩🔔🐚📿🔱 छोटे-छोटे उपाय हर unघर में लोग जानते हैं, पर उनकी विधिवत् जानकारी के अभाव में वे उनके लाभ से वंचित रह जाते हैं।हमारे आसपास पाए जाने वाले विभिन्न पेड़-पौधों के पत्तों, फलों आदि का टोटकों के रूप में उपयोग भी हमारी सुख-समृद्धि की वृद्धि में सहायक हो सकता है। यहां कुछ ऐसे ही सहज और सरल उपायों का उल्लेख प्रस्तुत है, जिन्हें अपना कर पाठकगण लाभ उठा सकते हैं। ♦बिल्व पत्र : अश्विनी नक्षत्र वाले दिन एक रंग वाली गाय के दूध में बेल के पत्ते डालकर वह दूघ निःसंतान स्त्री को पिलाने से उसे संतान की प्राप्ति होती है। ♦अपामार्ग की जड़ : अश्विनी नक्षत्र में अपामार्ग की जड़ लाकर इसे तावीज में रखकर किसी सभा में जाएं, सभा के लोग वशीभूत होंगे। ♦नागर बेल का पत्ता : यदि घर में किसी वस्तु की चोरी हो गई हो, तो भरणी नक्षत्र में नागर बेल का पत्ता लाकर उस पर कत्था लगाकर व सुपारी डालकर चोरी वाले स्थान पर रखें, चोरी की गई वस्तु का पला चला जाएगा। ♦संखाहुली की जड़ : भरणी नक्षत्र में संखाहुली की जड़ लाकर तावीज में पहनें तो विपरीत लिंग वाले प्राणी आपसे प्रभावित होंगे। ♦आक की जड़ :...

कैसे उसे बुलाऊँ मैं

नयनो से हैं रूठी नीदें सपन कहाँ सजाऊँ मैं। दूर हो गइ रूह जिगर से वापस  कैसे  लाऊँ  मैं। सूख गये आँसू आँखों के कैसे  धार   बहाऊँ   मैं। सुनने वाला पास नहीं जब हालेदिल किसे सुनाऊँ मैं। बाती है पर स्नेह नहीं जब फिर कैसे दीप जलाऊँ मैं। रिसते हों जब जख्म ह्रदय में मरहम   कहाँ  लगाऊँ   मैं। हार गया हूँ तनहा रहकर कैसे   उसे   बुलाऊँ   मैं। फूलों की खुशबु जब आती दिल  को  कहाँ  सजाऊँ  मैं। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"