उसके बाद।
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बालापन था बीत चुका जब
आई जवानी चितवन में
छूट गये सब खेल खिलौने
यौवन के ही उलझन में
काश!
पुनः आ पाती वह याद
फिर क्या हुआ था उसके बाद?
सघन वनों की शीतल छाया
अद्भुत थी तब गाँव की माया
झरने से बहते निर्मल जल
भाया मुझको कल कल वह नाद
फिर क्या हुआ था उसके बाद?
सुन्दर सुरभि पुष्प खिले थे
हरित तृण भी पाँव तले थे
शायद हम तुम वहीं मिले थे
संग संग हिल मिल एक हुये थे
प्रणय गीत की मधुर कंठ से
तुमने थी छेड़ी मधुर निनाद
फिर क्या हुआ था उसके बाद?
....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"
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