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होमाहुति।

होमाहुति विशेष
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१👉 अग्नि के "मुख" में आहुति देने से सर्व कार्य सिद्धि होते है।

२👉 अग्नि के "कर्ण प्रदेश" में - व्याधि होती है।

३👉 अग्नि के "नेत्र" में - अन्धापन आ सकता है।

४👉  अग्नि के "नासिका" में - मानसिक कष्ट होंगे।

५👉 अग्नि के "मस्तक" में आहुति देने से - धन का क्षय होता है।

अग्निदेव जानकारी   
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१👉 जिस भाग में काष्ठ हो - कर्ण
२👉 कम जलने वाला भाग - नेत्र
३👉 धुआं वाला भाग - नासिका
४👉 अंगारों वाला भाग- मस्तक व
५👉 अग्नि शिखा वाला भाग - अग्नि का मुख (जिह्वा)कहलाता है।

हवन आहुति फल
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१👉 मधु के होम से - उपद्रव नष्ट 
२👉 घी-सम्पत्ति प्राप्ति
३👉 दही-आरोग्य प्राप्ति
४👉 दूध-गांव प्राप्ति
५👉 अंगूर-इष्ट सिद्धि
६👉 लाजा(खील)-राज्य प्राप्ति
७👉 कमल-धन प्राप्ति
८👉 अनार-राजा वश
९👉 बिजौरा-क्षत्रिय वश
१०👉 नारंगी-वैश्य वश
११👉 पेठा-शूद्र वश
१२👉 केला-मंत्री वश
१३👉 चम्पा व गुलाब-विश्व वश
१४👉 नारियल-सम्पत्ति प्राप्ति
१५👉 गुग्गुल-दु:ख नष्ट
१६👉 गुड़-मनोरथ सिद्धि
१७👉 तिल-अभीष्ट सिद्धि
१८👉 क्षीर-धन धान्य प्राप्ति
१९👉 आम-जीव वश
२०👉 बेल फल-अतुल लक्ष्मी प्राप्ति
२१👉 ईख-सुख प्राप्ति
२२👉 कपूर-कवित्व प्राप्ति
२३👉 राई नमक-दु:ख नाश
२४👉 घी,तिल,चावल-शांति प्राप्ति
२५👉 केशर,कुमकुम,कपूर-रूप प्राप्ति।
२६👉 मालती फूल-वागीशता की प्राप्ति होती है।

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रावण का काम तमाम । ****************** माना कि मैं अत्याचारी था देव मनुज सब पर ही भारी था। सीता का कर अपहरण  नारी का अपमान किया। प्रकृति विरुद्ध सब काम किया इसीलिये तो तुमने मृत्युदान दिया। मैं तो मरकर परलोक गया अपनी सत्ता सब सौंप गया। फिर भी हर वर्ष बुलाते हो पुतले को आग लगाते हो दुनिया को ये समझाते हो। रावण को मैंने जला दिया लंका का दीपक बुझा दिया। एक प्रश्न मैं तुमसे करता हूँ उम्मीदें प्रत्युत्तर की रखता हूँ। रावण तो जीवित रहा नहीं कुंभकरण भी बचा नहीं। लंका भी जलकर राख हुई मेघनाद की भी साख गई । फिर भी सीता अब क्यों रोती है नित नारी अपह्रत क्यों होती है? पुतले को आग लगा करके अपने को राम कहाते हो। बलात्कारिता निज सीता को बचा नहीं तुम क्यों पाते हो ? रामत्व तुम्हारा रहा नहीं या रावण है बचा कहीं? सौगंध तेरा तुझको देता हूँ जिस क्षण बन जाओगे तुम राम  होगा छिपे हुये रावण का काम तमाम। ....मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"

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