ना मुझे काँटों वाला गुलाब चाहिये
ना ही सपनो वाला ख्वाब चाहिये
ना मुझे तुझ सा शवाब चाहिये
ना ही छुपने को हिजाब चाहिये
ना ही काले बाल का खिजाब चाहिये
बस एक अदद ख्वाहिश है हुजूर
मुझे तो बस जुल्मोसितम से दिगर
पाक दिल ज़नाब चाहिये।।
...मनोज कुमार मिश्र "पद्मनाभ"।
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