अचानक से गली में
आवारा कुत्तों की फौज देखकर
परेशान होना लाजिमी था
कारण जानने की
उत्सुकता लिये निकल पड़ा
घर से बाहर
देखा पड़ोस के दरवाजे पर
लगे ठेले से मजदूर
उतार रहे थे
बासमती चावल ,आँटे,दाल
आलू,चीनी, हरी शब्जी की
बोरियाँ और
गरम मशाले की पैकेट
पत्तलों की बंडल के साथ ही
कुछ हरी शब्जियों के भरे
बोरे भी साथ में
सरसों के तेल और
डालडे के टीन भी
माजरा कुछ समझ में आया
लगता है भोज है
देखते देखते ठेले वाला
सारे सामान उतारकर
रफुचक्कर हो गया
गली के कुत्तों की फौज की आवाज
थोड़ी धीमी हो गई
शांति का अनुभव हुआ
जमकर सोया रातभर
होत प्रात जिज्ञासा वश
छत की मुंडेर से झाँकने लगा
गली में
एक भी कुत्ता नजर नहीं आया
परेशान हाल एकबार फिर
ये देखने पड़ोसी के दरवाजे तक गया
कि शायद हलवाइयों ने
पक्वान्न बनाना शुरु कर दिया होगा
किंतु ये क्या
वहाँ तो बड़े बड़े ताले लटक रहे थे
माजरा समझ में आया
कुत्तों की फौज के हट जाने का
भोज कहीं और था
यहाँ तो कुछ देर के लिये
सारे सामान विश्राम के लिये
लाये गये थे।।
......मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"।
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