तेरी बातों ने सचमुच मेरे दिल में
एक कसक सी जगाई है
मेरे सोते जिस्म में फिर से आई तरुणाई है
मौसम ने जबसे ली अंगड़ाई है
सच कहूँ सारी रात करवटें बदलता रहा
तूने मेरी आँखों से नींद उड़ाई है।
जब जब भी कोशिश की सोने की
सपने में तेरी मधुर मुस्कान नजर आई है
अब तो हर साँस में तेरी ही महक समाई है
दुआ करता हूँ रब से हर शै यही
बढ़ता रहे ये पौध यूँ ही
जो तूने दिल की जमी पे लगाई है
टूटा हुआ दरख्त था मैं तो फिर से
काँटों की राह में चलने की जुगत बताई है।।
.......मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"।
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