जब भी कोई बात
बोलता हूँ
उस बात के पीछे भी
कोई बात होती है
ये सब जानते हैं
बिन बात के कोई बात
नहीं होती है
जनाब यह भी जानते हैं
कि बातों बातों मे ही कोई
बात होती है
न घात होती है न प्रतिघात होती है
जब भी बातों की बातें होती हैं तो
दिल पे आघात होती है
बात चाहे न्यौते की हो
बात चाहे समझौते की हो
बात बात के फिरौते की हो
हर बार जज्बातों से ही बात होती है
गलबातों से बात होती है
बात तो बस बातों से होती है
बात बात पे बात होती है
बात के आगे बात होती है
बात के पीछे बात होती है
बात के बीच में भी बात होती है
बात के अंत में भी बात होती है
पर गजब होता है
बात के अंत की भी बात है
बाप के बात पर बात होती है
माँ के बात पर बात होती है
भाई के बात पर बात होती है
मित्रों के बात पर बात होती है
शाली शाले की बात पर बात होती है
सरहज साढ़ू की बात पर बात होती है
बच्चों की बात पर तो बात अब पूछो मत
आजकल तो हर घर में सबसे प्यारी
पत्नी की हर बात पर बात होती है
देश की सरहद पर बात होती है
संसद के भीतर भी बात होती है
संसद के बाहर भी बात होती है
जात पर बात होती है
जमात पर बात होती है
पर फिर भी जब आपने सामने होते हैं
सब कहते हैं कहाँ कोई बात होती है
सब बेबात की बात होती है
माना कि सब बेबात की बात होती है
कभी मन की भी बात होती है
कभी तन की भी बात होती है
बातों का सिलसिला यूँ ही चलता रहा तो
एकदिन बेबुनियाद की बात होती है
फिर क्यूँ नहीं बात की बात होती है?
.......मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"।
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