हो गर दर्द कहीं दबा न
लेनी चाहिये
दर्दे दिल में बताई दवा
लेनी चाहिये
मासूक को हर शै ये बात
मासुका को बता देनी चाहिये
ना समझ होते हैं वो जिन्हें ये बात
पता नहीं
मुहब्बत में न कोई बात छुपा
लेनी चाहिये
दरिया ए दिल महान होता है मनोज
न सोंच कुछ भी
थोड़ा झुककर ही सही
रूठी हो जिन्दगी तो मना
लेनी चाहिये
क्या पता कब आ जाये बुलावा
परवरदिगारे आलम के यहाँ
दिखे जो कहीं कीचड़ में
पद्मनाभ
बस तोड़कर गले से लगा लेनी
चाहिये।।
.........मनोज कुमार मिश्र"पद्मनाभ"।
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